खडडा में बना कांशीराम आवास,संवाद
खड्डा। कांशीराम शहरी आवास अराजकतत्वों का अड्डा बन गया है। अवैध तरीके से रहने वाले कई लोग आपराधिक प्रवृत्ति के हैं और वारदातों को अंजाम देते रहते हैं। वैध तरीके से रहने वाले लोगों को कमरे खाली करने के लिए धमका रहे हैं। यहां कई ऐसे लोगों को आवास आवंटित हुआ है जो प्रधानमंत्री आवास भी बनवा लिए हैं और दूसरे जगह घर भी है। बदमाशों को आवास किराए दे रखा है। आवास में वैध तरीके से रहने वाले लोगों ने इसकी शिकायत डीएम से की है। डीएम के आदेश पर एसडीएम ने जांच टीम गठित की है।
खड्डा के सिंचाई विभाग की जमीन पर करीब 15 वर्ष पहले काशीराम शहरी गरीब आवास का निर्माण कराया गया था। यह अब जर्जर हो चुका है। तत्कालीन डीएम ने करीब 104 लोगों को आवास आवंटित किया था। लेकिन इसके इतर कई लोग अनधिकृत रूप से कमरे में कब्जा जमाए हैं। जिनके नाम से आवास आवंटित हुआ है। उनमें से कई लोगों ने आवास को किराए पर दे दिया है। अनधिकृत कब्जा करने वालों में तमाम लोगों के संदिग्ध कार्यों में लिप्त होने की जानकारी मिलती रहती है। कुछ ऐसे लोग भी यहां रहते हैं जिन्होंने प्रधानमंत्री आवास का भी लाभ ले रखा है और उनका अन्य आवास भी है।
इसमें रहने वाले कुछ लोगों ने डीएम से शिकायत की कि अवैध कब्जा करने वाले लोग वैध लोगों को भगा रहे हैं। डीएम महेंद्र सिंह तंवर के आदेश के बाद एसडीएम रामवीर सिंह ने नायब तहसीलदार अभिषेक कुमार के नेतृत्व में राजस्व निरीक्षक अजित कुमार, लेखपाल अजित कुमार, विभव शर्मा, राधेश्याम, विजेंद्र सिंह की टीम गठित कर जांच करके रिपोर्ट तलब की है।
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नायब तहसीलदार की अगुआई में टीम गठित की गयी है। टीम काशीराम आवास में रहने वाले वैध व अवैध लोगों की जांच कर सभी विंदु की रिपोर्ट देगी।गलत तरीके से प्रयोग करने वाले तत्वों पर कड़ी कार्रवाई होगी। -रामवीर सिंह, एसडीएम खड्डा
अब तक नगर पंचायत को सुपुर्द नहीं
15 वर्ष बाद भी कांशीराम आवास का निर्माण अभी अधूरा है। यह भवन अब भी नगर पंचायत को सुपुर्द नहीं हुआ है। रख रखाव ठीक से नहीं होने के कारण अधिकांश कमरे जर्जर हो गए हैं। भूकंप सहित अन्य प्राकृतिक आपदा से भवन खतरे में है। इसमें वैध व अवैध तरीके से निवास करने वाले लोगों की जान जोखिम में है। पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष शारदा तुलस्यान बताती है कि उनके कार्यकाल में कार्यदायी संस्था आवास विकास ने बिना कार्य पूर्ण किए कांशीराम आवास नगरपंचायत को सौंपना चाहा, परंतु कुल 26 बिंदुओं की कमी के चलते इसे नगरपंचायत ने लेने से इन्कार कर दिया था।