इंसेफेलाइटिस: अब मासूमों को बचाएगा स्वदेशी टीका
अब तक जेई के लिए लगता था चाइनीज टीका
जेनवेक कंपनी कर रही स्वदेशी टीके का उत्पादन
चार घंटे में नहीं खराब होगी जेई की स्वदेशी वैक्सीन
जिले में 10-12 हजार बच्चों को प्रतिमाह लगती है वैक्सीन
राकेश कुमार गौंड़
कुशीनगर। केंद्र सरकार की तरफ से स्वदेशी वस्तुओं के अधिकाधिक प्रयोग की दिशा में एक नई उपलब्धि और जुड़ने जा रही है। जापानी इंसेफेलाइटिस से मासूमों को बचाने के लिए वर्षों से लगाई जाने वाली चाइनीज वैक्सीन की हमेशा के लिए छुट्टी हो जाएगी। अब इसकी जगह स्वदेशी वैक्सीन की आपूर्ति होने जा रही है। कुशीनगर में अगले सप्ताह टीका उपलब्ध होने की पूरी संभावना है।
कुशीनगर में वर्ष 1995 से मासूमों पर इंसेफेलाइटिस का कहर टूटता रहा है। पिछले तीन-चार वर्षों में इसके प्रभाव में थोड़ी कमी आई है। बच्चों को तेज बुखार, शरीर में अकड़न और झटके आते देखकर माता-पिता का कलेजा डर से फटने लगता था। इसकी रोकथाम के लिए टीका और इलाज के लिए जिला मुख्यालय पर पीआईसीयू (पीडियाट्रिक एसेंसियल केयर यूनिट), शुद्ध पेयजल सहित अन्य इंतजाम किए जाने के बाद इसके दुष्प्रभाव में कमी आई। मौजूदा समय में जिले में औसतन एक लाख पांच हजार बच्चों को प्रतिवर्ष जेई का टीका लगाया जाता है, जबकि महीने में यह रेशियो 10 से 12 हजार का है। इसके लिए जिले में करीब 500 टीकाकरण बूथ प्रत्येक बुधवार और शनिवार को लगाए जाते हैं। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक जेई से बचाव के लिए अभी जो टीका लगाया जाता है, वह चीन निर्मित है। जेई (जापानी इंसेफेलाइटिस) से मुकाबला करने के लिए भारत सरकार की तरफ से अब जेनवेक कंपनी के स्वदेशी टीके की आपूर्ति शुरू की जा रही है। कुशीनगर में अगले सप्ताह यह टीका आ जाने की संभावना है। संवाद
टीके की विशेषता
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी ने बताया कि चीन निर्मित टीका खुलने के चार घंटे बाद खराब हो जाता था। उस वॉयल में पांच डोज होती थी। यदि उसमें वैक्सीन बच जाती थी तो उसका सदुपयोग नहीं हो पाता था। इस टीके का प्रत्येक वॉयल भी पांच डोज का है। अगर इस वॉयल में कुछ डोज बचती है तो उसे पुन: ब्लॉक स्तर के कोल्डचेन में रखा जा सकता है। स्वदेशी होने के कारण इसकी नियमित आपूर्ति बनी रहेगी। चीन निर्मित टीका बच्चों के बांह में लगता है, जबकि स्वदेशी टीका जांघ में लगाया जाएगा।
पिछले 26 वर्षों में इंसेफेलाइटिस से 2485 बच्चों की हुई है मौत
इस साल 120 मासूम इंसेफेलाइटिस की चपेट में आए हैं
इंसेफेलाइटिस से बचाव के लिए चीन निर्मित टीका लगाया जाता है, लेकिन अब केंद्र सरकार स्वदेशी टीका उपलब्ध कराएगी। इसी वजह से जिले में जेई के टीके का अभाव है। सरकार की तरफ से अगले सप्ताह स्वदेशी टीका उपलब्ध करा दिया जाएगा। - डॉ. संजय कुमार गुप्ता, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी