पडरौना की बंद पड़ी चीनी मिल। संवाद
पडरौना। शहर में बंद पड़ी कानपुर शुगर वर्क्स (मिल) को दोबारा चालू कराने की कवायद शुरू होते ही किसान, कर्मचारी और व्यापारियों में खुशी का माहौल है। मिल चालू होने से क्षेत्र के छह हजार से अधिक किसानों को सीधा लाभ होगा। हालाकि मिल चलाने में प्रशासन को कई चुनौतियों से गुजरना होगा। सबसे पहली चुनौती मिल की करीब 34 एकड़ जमीन की तलाश जिला प्रशासन को करनी होगी।
पूर्व में तहसील प्रशासन की तरफ से हुए जांच में मिल की जमीनों पर लोगों का कब्जा मिला था। इस पर करीब 100 लोगों ने तो पक्का मकान बना लिया है। वहीं किसानों को बकाया गन्ना मूल्य का 1501.27 लाख रुपये और अंशदान का बकाया 73.43 लाख रुपये के अलावा कर्मचारियों का भी 10 करोड़ रुपये से अधिक का वेतन, ग्रेच्युटी और अन्य देयों का बकाया भुगतान करना होगा।
बताया जा रहा है कि वर्ष 1934 में मिल को पडरौना राज परिवार ने बनवाया था। वर्ष 1956 में नीलामी में इसे कानपुर शुगर वर्क्स ने खरीद लिया था। इसका ज्यादा हिस्सा पडरौना तहसील के राजस्व गांव जंगल विशुनपुरा में है। राजस्वकर्मियों के अनुसार मिल के नाम से 154.36 एकड़ जमीन थी, लेकिन राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में 34 एकड़ में मिल होने की बात कही गई है। मिल की शेष जमीन चकबंदी के बाद सिलिंग में चले जाने की बात कही जा रही है।
हालाकि मिल की जमीन का वास्तविक आकड़ा राजस्व विभाग की तरफ से चल रही जांच में ही स्पष्ट हो सकेगा। मिल की जमीन पर कब्जे के आधार पर राजस्व अभिलेखों में फर्जीवाड़ा कर 100 से अधिक लोगों ने अपना नाम दर्ज करा लिया। फरवरी में विशेष सचिव के आदेश के बाद शुरू हुई जांच में अधिकतर जमीनों पर लोगों का कब्जा मिला है। मकान निर्माण के अलावा लोग झोपड़ी और कटरैन भी डाल रखे हैं। इसके अलावा पशुओं को बांधने, वाहन खड़ा उक्त जमीन में कर रहे हैं।
मिल की जमीन खाली करना जिला प्रशासन के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। इसके अलावा जिनके घर के आसपास चीनी मिल की खाली जमीन थी, उन्होंने भी इस पर कब्जा कर लिया है। शासन का पत्र मिलने के बाद सक्रिय हुए प्रशासन के लिए चीनी मिल की जमीन से अतिक्रमण हटाना किसी चुनौती से कम नहीं होगा। हालाकि डीएम के आदेश के बाद तहसील प्रशासन की तरफ से चीनी मिल की जामीन का पुन: नए सिरे से जांच पड़ताल शुरू कर दी गई है। जांच पूरा होने पर वास्तविक तस्वीर साफ हो सकेगा।