पडरौना। यूपी बोर्ड सहित सीबीएसई बोर्ड की परीक्षाएं शुरू होने वाली हैं। ज्यादा से ज्यादा नंबर पाने की होड़ में छात्र-छात्राएं स्वास्थ्य का ख्याल नहीं रख पाते हैं। उनमें घबराहट, चिंता और तनाव काफी अधिक बढ़ रहा है। चिकित्सकों की सलाह है कि तनाव न लें। पूरी नींद ले और खानपान पर भी विशेष ध्यान दें।
सीबीएसई बोर्ड की 12 व यूपी बोर्ड की 24 फरवरी से हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की परीक्षाएं शुरू हो रही हैं। परीक्षा में अच्छे अंक लाने के लिए छात्र-छात्राएं दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। ऐसे में वह तनाव में घिर जा रहे हैं। अधिक मेहनत के चक्कर में नींद भी नहीं पूरी हो रही है। इसके चलते वे बीमार हो जा रहे हैं। मनोचिकित्सक और मनोविज्ञान विषय के विशेषज्ञ विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान निश्चित अंतराल और भरपूर नींद लेने की सलाह दे रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इसके अलावा पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को संतुलित आहार लेना चाहिए।
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अभिभावक अपने बच्चों को संतुलित आहार के साथ सात-आठ घंटे की नींद जरूरी लेने दें। इससे पढ़ाई में एकाग्रता बढ़ेगी। विद्यार्थियों के रात-दिन जागकर पढ़ाई करने से सेहत पर असर पड़ सकता है। मानसिक थकान के चलते याददाश्त पर सीधा असर पड़ता है। नींद कम लेने से कोर्टिसोल नाम का हॉर्मोन बढ़ सकता है। इसका असर याददाश्त पर पड़ता है और चीजें ज्यादा देर तक याद नहीं रह पाती हैं, इसलिए 7-8 घंटे की नींद बेहद जरूरी है। इससे दिमाग को पर्याप्त जरूरी आराम मिल सकेगा और नई ताजगी के साथ बेहतर काम करेगा।
- डॉ. अरुण कुमार तिवारी, मोनोचिकित्सक।
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स्वास्थ्य को बेहतर रखने में भोजन का विशेष महत्व होता है। इसलिए परीक्षार्थियों को पोषक तत्व से भरपूर ताजा भोजन लेना चाहिए। पढ़ाई का समय निर्धारित कर पाठ्यक्रम पर ध्यान देने के अलावा भरपूर नींद भी लें। देर रात तक न पढ़ें। यदि नींद पूरी नहीं हुई तो पढ़ाई में मन नहीं लगने के अलावा उनके भीतर चिड़चिड़ापन आ जाता है। मनोरंजन के लिए भी थोड़ा समय निकालें।
- डॉ. सीमा त्रिपाठी, प्रोफेसर, मनोविज्ञान, बुद्ध पीजी कॉलेज, कुशीनगर।
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विद्यार्थी इन बातों का रखें ख्याल
- हमेशा ताजा और हल्का भोजन लें, सलाद का प्रयोग अधिक करें।
- समय सारणी बनाकर परीक्षा के दौरान कार्य करें।
- नींद पूरी करें, बीमार होने पर डॉक्टर की सलाह पर ही दवा लें।
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अभिभावक क्या करें
- घर में शांत और खुशनुमा माहौल बनाए रखें।
- बच्चों को हेल्दी और पौष्टिक खाना दें।
- बच्चों के साथ दोस्ताना बर्ताव करें।
- बच्चे की आलोचना करने से बचें।
- किसी अन्य बच्चे से तुलना बिल्कुल न करें।