एआरटीओ कार्यालय में लिपिकों की कुर्सी पर बैठकर दलालों के काम करने का मामला प्रकाश में आने के बाद डीएम महेंद्र सिंह तंवर ने एसडीएम को जांच के निर्देश दिए हैं। कार्यालय में बैठकर काम करने के लिए दलालों को प्रश्रय देने वाले भी जांच के दायरे में हैं। कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच होगी। इससे दलालों को शह देने वाले कर्मचारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
अरुणाचल प्रदेश में आवेदन के बाद बस्ती से फर्जी तरीके से जारी डीएल की जांच में कुशीनगर के कोड यूपी 57 का इस्तेमाल किया गया था। यह फर्जीवाड़ा पकड़े जाने के बाद एआरटीओ कार्यालय चर्चा में आ गया।
बावजूद इसके चार दिन पहले तक एआरटीओ कार्यालय के अंदर बाबुओं की कुर्सी पर दलाल बैठकर सरकारी काम निपटाते नजर आए थे, डीएम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एसडीएम को जांच के निर्देश दिए हैं। एसडीएम दलालों की सक्रियता और काउंटर के अंदर बैठकर काम करने वाले दोनों दलालों के बारे में जानकारी करने के अलावा एआरटीओ कार्यालय में होने वाली गतिविधियों की रिपोर्ट डीएम को सौंपेंगे।
इसके बाद आगे की कार्रवाई होगी। सूत्रों ने बताया कि एआरटीओ कार्यालय के जो कर्मचारी दलालों से काम कराते थे, वे खुद के बचाव में अफसरों पर राजनीतिक दबाव बनवाना शुरू कर दिए हैं। हालांकि जांच में अगर दलालों का बचाव हुआ तो माना जाएगा कि एआरटीओ कार्यालय के बाबुओं को ही सह देने में संलिप्तता है।
इसके अलावा शासन से जांच के लिए चार सदस्यीय टीम गठित की है, जो जारी डीएल की सत्यता की जांच करेगी। दोहरी जांच की आंच से एआरटीओ की बेचैनी बढ़ गई है।
एआरटीओ कार्यालय के अंदर काउंटर पर बैठकर बाहरी लोगों के काम करने की जानकारी मिली है। जांच के लिए एसडीएम को निर्देश दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद जिसकी भूमिका साबित होगी, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी: -महेंद्र सिंह तंवर, डीएम