कसया। बुद्ध पीजी कालेज में चल रहे एनएसएस के विशेष शिविर के छठवें दिन आयोजित बौद्धिक सत्र में महिला की पारिवारिक एवं सामाजिक भूमिका पर विचार-विमर्श किया गया।
मुख्य वक्ता डॉ. प्रतिभा तिवारी ने कहा कि महिला को परिवार और समाज दोनों की जिम्मेदारी निभानी पड़ती है। प्रकृति ने स्त्री को सृजन की अनूठी क्षमता दी है। परिवार की जिम्मेदारी पुरुष और महिला दोनों मिलकर निभाते हैं, लेकिन केंद्रीय भूमिका प्रायः महिला की होती है। उन्होंने कहा कि कामकाजी महिलाओं के सामने करियर और पारिवारिक दायित्वों के बीच संतुलन बनाए रखना बड़ी चुनौती है। परिवार का सहयोग मिलने पर महिला दोनों दायित्वों का बेहतर निर्वहन कर सकती है।
अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. सीमा त्रिपाठी ने कहा कि महिलाओं को अपनी पहचान स्थापित करने के साथ परिवार की जिम्मेदारी भी निभानी होती है। लिंगभेद की स्थिति में यह चुनौती और बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि पुरुषवादी या नारीवादी दृष्टिकोण से आगे बढ़कर सहअस्तित्व की भावना से परिवार और कार्यस्थल पर सामंजस्य स्थापित किया जा सकता है। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन से हुई। विषय प्रवर्तन डॉ. निगम मौर्य ने किया। स्वागत एवं परिचय डॉ. पारस नाथ ने कराया, जबकि आभार ज्ञापन डॉ. जितेंद्र मिश्र ने किया। संचालन स्वयंसेविका शिवानी गुप्ता ने किया। प्रश्नोत्तर सत्र में स्वयंसेवक अभिषेक कुमार, शाहीन परवीन और निधि सिंह ने प्रश्न पूछे।