नरवाजोत बांध के किनारे लगाए जा रहे पत्थर। संवाद
तमकुहीरोड। गंडक नदी का डिस्चार्ज रविवार को 40 हजार क्यूसेक से कम हो गया। जिससे एपी बांध और नरवाजोत बांध के अधिकतर जगहों पर पानी का दबाव कम होने लगा है। इससे जहां ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है वहीं बचाव कार्य तेज कर दिया गया है। दूमरी ओर ग्रामीणों में डिस्चार्ज बढ़ने की आशंका बनी हुई है। उन लोगों का मानना है कि स्वीकृत परियोजनाओं का कार्य अभी भी बाकी है। ऐसे में डिस्चार्ज बढ़ा तो इसका खामियाजा बांध के किनारे बसे लोगों को भुगतना पड़ सकता है।
गंडक नदी का डिस्चार्ज रविवार को 40 हजार क्यूसेक से नीचे आ गया है। जिससे नरवाजोत, पिपराघाट, जवही दयाल, विरवट कोन्हवलिया, मुसहर टोला, बाकखाश, बाघाचौर, नोनिया पट्टी, कचहरी टोला सहित बांध के अधिकांश संवेदनशील जगहों पर पानी का दबाव कम होने लगा है। जिससे बांध बचाव में लगे जेई व अभियंताओं ने राहत की सांस ली है। क्षेत्र के राजेंद्र सिंह, प्रभुनाथ यादव, मनोज गुप्ता, शैलेंद्र चौधरी, सीताराम चौहान, अर्जुन मंडल आदि का कहना है कि बरसात का सीजन अभी सितंबर तक जारी रहेगा। वैसे भी मानसून के थम जाने से अभी भी पर्याप्त बारिश नहीं हुई है। इन लोगों का मानना है कि जैसे ही नेपाल की पहाड़ियों पर बारिश होगी, वैसे ही वाल्मीकिनगर बैराज से गंडक नदी में भारी मात्रा में पानी छोड़ने का सिलसिला तेज होगा। ऐसे में जहां परियोजना का कार्य अधूरा है, वहां खतरा बढ़ सकता है। लोगों ने संभावित खतरे को देखते हुए परियोजना के कार्यो को शीघ्र पूरा कराये जाने की मांग की है। बाढ़ खंड सेवरही के एसडीओ दीपरतन सिंह ने कहा कि बचाव कार्य जारी है। किसी भी संभावित खतरे को देखते हुए तटबंधों पर पैनी नजर रखी जा रही है।