पडरौना। मेडिकल कॉलेज कुशीनगर में मुफ्त डायलिसिस की सुविधा तो है, लेकिन हर डायलिसिस में लगने वाला इंजेक्शन मरीजों को बाहर से खरीदना पड़ता है। जबकि एक इंजेक्शन की कीमत बाजार में 400, 800 व 1600 रुपये तक है। डायलिसिस की मुफ्त सुविधा होने के बावजूद मरीज को चार से पांच हजार रुपये का हर माह अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है।
डायलिसिस यूनिट में हर माह 1500 से 1700 डायलिसिस हो रही है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से मुफ्त डायलिसिस के दावे तो किए जाते हैं लेकिन तीमारदारों की हर डायलिसिस पर जेब ढीली करनी पड़ रही है। दरअसल, डायलिसिस में प्रयोग किए जाने वाला एरिथ्रोपोइटिन इंजेक्शन मरीजों को हर बार बाजार से खरीदना पड़ता है। एक इंजेक्शन की कीमत बाजार में अलग-अलग डोज के हिसाब से 400 से 800 व 1600 रुपये तक है। 60-70 फीसदी मरीजों की माह में आठ बार तक डायलिसिस हो रही है। ऐसे में मरीजों को हर बार खून बढ़ाने के लिए यह इंजेक्शन प्रयोग किए जाता है।
0
कोट
डायलिसिस सुविधा मुफ्त है। खून में हीमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए एरिथ्रोपोइटिन इंजेक्शन की आवश्यकता होती है। इसकी सप्लाई नहीं होती है। आयुष्मान कार्ड धारक मरीजों के लिए इस इंजेक्शन की खरीदारी होती है। चिकित्सक के परामर्श व कम खून होने पर ही इसे मरीज को लगाया जाता है। -डॉ. दिलीप कुमार, सीएमएस मेडिकल कॉलेज कुशीनगर
0000
इसलिए प्रयोग किया जाता है इंजेक्शन
अस्थि मज्जा (हड्डियों के भीतर के ऊतक जो लाल रक्त कोशिकाएं निर्मित करते हैं) को अधिक संख्या में लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में मदद करता है। एपोइटिन अल्फा, ह्यूमन ग्लाइकोप्रोटीन हार्मोन के एक समान प्रकार से संबंध रखता है जिसे एरिथ्रोपोइटिन कहा जाता है। एपोइटिन अल्फा, लाल रक्त कोशिका के उत्पादन को बढ़ाता है।
0
तीमारदारों ने बयां किया दर्द:
-पांच महीने से बेटे की प्रत्येक सप्ताह में एक बार डायलिसिस हो रही है। हर बार इंजेक्शन खरीदकर लाना पड़ता है। मुफ्त डायलिसिस के साथ यह इंजेक्शन मुफ्त मिले तो इससे काफी राहत व आर्थिक बोझ भी कम होता। एरिथ्रोपोइटिन का इंजेक्शन डायलिसिस कराने वाले हर मरीजों को मुफ्त उपलब्ध होना चाहिए। -जनार्दन मिश्र, कोहरवलिया
0
-नौ साल से पत्नी की डायलिसिस हो रही है। सप्ताह में तीन बार आना पड़ता है। खून बढ़ाने का इंजेक्शन सहित इलाज आदि का खर्च मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से मिली रकम से हो रहा है। डायलिसिस से लेकर दवा आदि का खर्च कम पड़ता है। हर मरीज के लिए निशुल्क इंजेक्शन का बंदोबस्त होना चाहिए। -बबलू उपाध्याय, बलुअही, खड्डा
0
-चार साल से पत्नी की डायलिसिस हो रही है। महीने में आठ बार डायलिसिस कराने आते हैं तो 450 रुपये का एक इंजेक्शन हर बार साथ लाते हैं। यहां का स्टाॅफ कहता है कि यहां इंजेक्शन की आपूर्ति नहीं होती। मुफ्त डायलिसिस के साथ दवाएं भी मुफ्त में मिलनी चाहिए। -नागेंद्र शर्मा, सपहा लक्ष्मीपुर
0
पिता की डायलिसिस सालों से हो रही है। डायलिसिस के अलावा कोई सुविधा नहीं मिल रही है। खून बढ़ाने वाला इंजेक्शन सहित डायलाइजर भी 450 रुपये का बाहर से ही खरीदते हैं। पहली बार डायलाइजर मुफ्त में मिला था। -सोनू सिंह, मीर बिहार
डायलिसिस सुविधा मुफ्त है। भारत आयुष्मान कार्ड धारक मरीजों को सिर्फ खून बढ़ाने के लिए इंजेक्शन निशुल्क में दिया जाता है। बिना आयुष्मान वालों को बाहर से ही खरीदना पड़ता है। यह इंजेक्शन रक्त बनाने के कार्य आता है। चिकित्सक के पर्चे पर परामर्श पर ही इसका प्रयोग करते हैं। -कैश अली, मैनेजर डायलिसिस यूनिट
0
पिछले कुछ महीनों में हुए डायलिसिस
जुलाई- 1560
अगस्त- 1616
सितंबर-1773
अक्तूबर- 150 शुक्रवार तक
0
हर महीने 24,000 से 30,000 की बचत
मुफ्त डायलिसिस सुविधा से मरीजों को हर महीने 24 से 30 हजार रुपये की बचत हो रही है,क्योंकि प्राइवेट अस्पतालों में हर डायलिसिस के लिए भी 3000 से 3200 रुपये चार्ज हैं। ऐसे में महीने में आठ से 12 बार डायलिसिस कराने वाले मरीजों को राहत है। वहीं एक महीने में खाने वाली दवाओं पर करीब 10-12 हजार रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
0
नेफ्रोलॉजिस्ट की जरूरत
मेडिकल कॉलेज के डायलिसिस यूनिट में मौजूदा समय में सिर्फ 197 मरीजों का पंजीकरण है। इन्हीं का चक्रवार सप्ताह व महीने भर डायलिसिस होता रहता है। तीमारदारों का कहना है कि मरीज को कोई दिक्कत होने पर नेफ्रोलॉजिस्ट नहीं होने से उन्हें गोरखपुर, लखनऊ व दिल्ली ही जाना पड़ता है।