एयरपोर्ट का निरीक्षण करती डीजीसीए की टीम। संवाद
कसया। अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट कुशीनगर का लाइसेंस विजिविलिटी फ्लाइंग रेगुलेशन (वीएफआर) श्रेणी से इंस्ट्रूमेंट फ्लाइंग रेगुलेशन (आईएफआर) श्रेणी में अपग्रेड करने के लिए डीजीसीए के असिस्टेंट डायरेक्टर ने दो दिन तक एयरपोर्ट पर रनवे, टर्मिनल बिल्डिंग, लाइट सहित एक-एक बिन्दुओं की विस्तार से जांच किया। लाइसेंस के लिए एयरपोर्ट के मानकों को परखा। टीम हेडक्वार्टर पर जांच रिपोर्ट सौंपेगी। उसके बाद ही लाइसेंस का अप्रूवल मिलने की कार्रवाई होगी। टीम निरीक्षण कर मंगलवार को दिल्ली चली गई। कुशीनगर एयरपोर्ट का लाइसेंस अपग्रेड करने के लिए दिल्ली से डीजीसीए के असिस्टेंट डायरेक्टर वेद प्रकाश प्रजापति सोमवार को एयरपोर्ट पहुंचे और लाइसेंस अपग्रेड से संबंधित सभी बिन्दुओं पर विस्तार से जानकारी ली। जिसमें टर्मिनल, बिल्डिंग, रनवे, लाइट और टीम ने मंगलवार को भी एयरपोर्ट पर रहकर अपनी जांच की एवं इसमें आ रही अड़चनों पर विचार विमर्श किया।
एयरपोर्ट पर उड़ान को लेकर इंडिगो, आकाशा और जेट विंग्स जैसी विमानन कंपनियों से सर्वे आदि की प्रक्रिया पूरी करने के बाद भी उड़ान सेवा शुरू नहीं हो सकी। डायरेक्टर जनरल सिविल एविएशन (डीजीसीए) के असिस्टेंट डायरेक्टर के निरीक्षण में लाइसेंस अपग्रेड को लेकर वन वन का तो रास्ता साफ मिला तो वही टू नाइन पर दो मकानों के आ रहे अवरोधों के बारे में जानकारी ली। डीजीसीए से अपग्रेड लाइसेंस प्राप्त होने के बाद यहां से विमान दिन या रात में लैंड और टेक आफ कर सकेंगे। पहले केवल दिन में उड़ान का लाइसेंस मिला था। इस दौरान राजीव श्रीवास्तव, एपी गुरनानी, अंकित कबड़वाल, नरेंद्र कुमार, उमेश चंद्रा, गौरव श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
तीन मकान बन रहे रोड़ा
कसया। एयरपोर्ट पर लगने वाले आईएलएस का निर्माण कार्य अंतिम चरण में चल रहा है। एयरपोर्ट उड़ान में तीन मकानें और दो टेलीकॉम कंपनियों का टावर रोड़ा बन रहे हैं। एयरपोर्ट के लिए जमीन की अधिग्रहण के दौरान ही भू स्वामियों व मकान मालिकों ने हाईकोर्ट में वादा दाखिल किया था। इसमें अधिकांश मामले प्रशासन की ओर से निपटा लिया गया है, लेकिन अभी तीन मकान ऐसे हैं जिस पर हाईकोर्ट की ओर से स्टे है। इसके लिए प्रशासन मकान मालिकों से वार्ता के अलावा हाईकोर्ट में भी अपना पक्ष रखा है, लेकिन स्टे अभी भी बरकरार है। इसके समाधान के बाद एयरपोर्ट से उड़ान का रास्ता साफ होगा।