कुशीनगर। त्योहारों में घर तक पहुंचने के लिए जब बसों की डिमांड बढ़ती है तो बस की संख्या स्थिर होने के चलते न केवल किराए में दोगुना की बढ़ोतरी होती है बल्कि यात्रियों की सुरक्षित सफर पर भी ग्रहण लग जाता है। त्योहारों के मौसम में लग्जरी बसों में यात्री इस कदर ठूस दिए जाते हैं जैसे किसी ऑटो रिक्शा में बैठे हों।
मजबूरी का फायदा उठाते हुए दिल्ली, नोएडा, जयपुर जैसे बड़े शहरों से बस संचालक 50-52 सीटों वाली बसों में 80-90 की संख्या में यात्री बैठाते हैं। दो लोगों वाली स्लीपर केबिन में चार लोग बैठाए जाते हैं वहीं रास्ते के लिए उपयोग होने वाली गैलरी में भी 20 से 30 की संख्या में यात्री बैठा दिए जाते हैं।
यही नहीं इनसे किराए भी दोगुना वसूल किए जाते हैं। वहीं जब यात्रियों की संख्या अधिक होती है तो जाहिर सी बात है कि समान भी अधिक होता है ऐसे में बसों की छत पर क्षमता से कहीं अधिक भार में समान रखे जाते हैं। बड़े शहरों से चलने वाली बसों को मथुरा, जेवर, लखनऊ, गोरखपुर और हेतिमपुर जैसे बड़े जगहों पर परिवहन विभाग के अधिकारियों द्वारा गाड़ी लगाकर बसों को रोका जाता है और फिर क्षमता से अधिक सवारी होने के चलते वसूली भी इनकी दोगुनी हो जाती है। सामान्य दिनों में जो मासिक चढ़ावा 70000 का होता है वह अचानक से डेढ़ से दो लाख का हो जाता है। तरयासुजान थाना क्षेत्र के हाईवे पर बहादुरपुर पुलिस चौकी से आधा किलोमीटर पहले बृहस्पतिवार सुबह छह बजे जयपुर से मधुबनी जा रही एक लग्जरी स्लीपर बस डिवाइडर से टकरा कर पलट गई।
हादसे में दो दर्जन से अधिक यात्री घायल हो गए। बताया जा रहा है कि जिस बस में यात्रियों के बैठने की क्षमता 50 की थी उसमें 100 से अधिक यात्री थे। जयपुर, राजस्थान,नोएडा,दिल्ली जैसे बड़े शहरों से आने वाली बसों में त्योहारों के दिनों के जब ट्रेन में टिकट नहीं मिलता तो लोगों को दोगुने दाम में बसों से आना मजबूरी हो जाती है।स्लीपर कैबिन में यात्रियों को सिमटकर बैठना पड़ता है। ़