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राजस्व निरीक्षक और लेखपालों की संख्या में आई कमी, बढ़ी परेशानी

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राजस्व निरीक्षक और लेखपालों की संख्या में आई कमी, बढ़ी परेशानी
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जिले में राजस्व निरीक्षक के 39 और लेखपाल के 123 पद खाली
कुशीनगर। राजस्व विभाग की महत्वपूर्ण कड़ियों में शामिल राजस्व निरीक्षकों और लेखपालों की संख्या में काफी कमी आ गई है। राजस्व निरीक्षक के स्वीकृत 63 पदों के सापेक्ष 24, लेखपालों के 427 पदों में करीब 304 की तैनाती है। जनपद में राजस्व गांवों की संख्या 1657 है। सृजित पदों के सापेक्ष 39 राजस्व निरीक्षक और 123 लेखपालों की आवश्यकता है।
इस वजह से एक-एक लेखपाल और राजस्व निरीक्षक के जिम्मे एक से अधिक गांवों की जिम्मेदारी है। कुछ वरिष्ठ लेखपालों को भी राजस्व निरीक्षक का कार्य करना पड़ रहा है। ऐसे में लोगों को वरासत से लगायत जमीन की पैमाइश, फसलों की पड़ताल, पट्टा आवंटन, जाति-आय और निवास प्रमाणपत्र के आवेदनों पर जांच और रिपोर्ट के लिए परेशान होना पड़ रहा है।
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जमीन संबंधी अभिलेख के रख-रखाव और उनके प्रबंधन की जिम्मेदारी राजस्व विभाग की होती है। जिले के 1657 राजस्व गांवों में विभागीय कार्यों को सही से संचालित करने के लिए राजस्व निरीक्षक के 53 पद सृजित हैं। इस विभाग से जुड़े लोगों की मानें तो 14 साल के इंतजार के बाद कुछ वर्ष पहले लेखपालों की पदोन्नति कर राजस्व निरीक्षक बनाया गया था। उनमें कई राजस्व निरीक्षक तीन वर्षों से नायब तहसीलदार के पद पर पदोन्नति पाने के इंतजार में सेवानिवृत्त हो गए और जो 24 बचे हैं, उनमें भी ज्यादातर कुछ वर्षों में सेवानिवृत्त हो जाएंगे। क्योंकि विभाग में पदोन्नति की प्रक्रिया रुकी हुई है।
इसी तरह लेखपालों के लिए सृजित 427 पदों के सापेक्ष 304 कार्यरत हैं। यह संख्या भी वर्ष 2016 में नियुक्ति के बाद बढ़ी थी। उस समय जिले को 189 नए लेखपाल मिले थे। हालांकि कुछ महीनों बाद अन्य विभागों में नौकरी लग जाने के बाद करीब 20 लेखपाल इस्तीफा देकर चले गए थे। राजस्व निरीक्षक और लेखपालों की संख्या कम होने के कारण उपलब्ध राजस्वकर्मियों को अतिरिक्त गांवों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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राजस्व विभाग में लेखपाल और राजस्व निरीक्षकों की संख्या कम है। नियुक्ति या पदोन्नति शासन स्तर से होनी है। जनपद के लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसलिए बगल के लेखपालों और राजस्व निरीक्षकों को दायित्व सौंपा गया है।
देवीदयाल वर्मा, एडीएम
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