बस में यात्रा करते लोग। स्रोत -सोशल मीडिया
पडरौना। लग्जरी बसों में सफर खतरनाक है। स्लीपर और डबल डेकर बसें, जिनमें यात्रियों को आराम से ले जाने की जिम्मेदारी होती है, अक्सर ओवरलोडिंग, भारी सामान और सुरक्षा की अनदेखी के साथ चलती हैं।
मथुरा में मंगलवार तड़के हुए भीषण एक्सप्रेस-वे हादसे ने यही हकीकत उजागर की। 11 डबल डेकर बसें, एक रोडवेज बस और तीन कारें आपस में टकराईं, दर्जनों लोग घायल और कई लोगों की मौत हुई।
कुशीनगर हाईवे पर जाकर देखा गया कि कैसे यात्रियों के लिए यह आराम का सफर कभी-कभी जानलेवा जाल में बदल जाता है।
घने कोहरे और तेज़ रफ्तार को अक्सर हादसों का कारण माना जाता है, लेकिन पड़ताल में सामने आया कि बसों में ओवरलोडिंग और भारी सामान यात्रियों की सुरक्षा पर सबसे बड़ा खतरा बनता है। कई स्लीपर बसों में यात्रियों के साथ सामान के भारी बैग और पैकेज रखे जाते हैं, जिससे हादसे के समय आग फैलना आसान हो जाता है और बचाव मुश्किल हो जाता है।
इतना सामान बस में रखा जाता है किसी को पता नहीं। एक यात्री ने कुशीनगर हाईवे पर बस चेकिंग के दौरान अपनी चिंता जाहिर की।
जानकर बताते हैं कि सिस्टम की लापरवाही भी साफ़ नजर आती है। फिटनेस पास और कागज़ों में सब कुछ सही दिखता है, लेकिन असली सुरक्षा मानकों का पालन अक्सर नहीं होता। चालक थके हुए हैं, समय की कमी होती है और ओवरलोडिंग जैसी लापरवाही आम हो गई है।