मुख्य पश्चिमी गंडक नहर परगन छपरा गांव के पास मंगलवार की शाम कंक्रीट का नवनिर्मित पैनल ध्वस्त।सं
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कुशीनगर। गौरहा गांव के पास एपी तटबंध सोमवार रात अचानक टूट गया। बचाव कार्य शुरू हुआ लेकिन मजदूरों और मिट्टी की कमी आड़े आ रही है। लगातार तीन दिन की बारिश से खेतों में पानी भर गया है, जिससे पर्याप्त मिट्टी नहीं मिल पा रही है।
गांवों में पानी पहुंचने से मजदूर मंगलवार को अपने घरों का सामान निकालने और सुरक्षित स्थानों पर जाने में जुटे रहे। इस कारण बचाव कार्य के लिए मजदूरों की कमी हुई। बाढ़ खंड के अधिकारियों ने महराजगंज, देवरिया, पश्चिमी चंपारण और वाराणसी जिले से ठेकेदारों से मजदूर मांगे। मिट्टी की जगह लाल बालू को बोरियों में भरकर रिसाव वाले स्थानों पर डाला जा रहा है। बुधवार को टूटे बंधे पर रिंग बांध बांधने का कार्य शुरू हुआ, पर मजदूरों की कमी से काम गति नहीं पकड़ पाया। एडीएम पवन कुमार और तमकुहीराज के एसडीएम कुणाल गौरव ने डीएम संजय चौहान को सूचना दी। इसके बाद बाढ़ खंड के अफसर बंधे को बचाने में जुटे, पर मंगलवार सुबह पांच बजे तक कोई नतीजा नहीं निकला। आयुक्त इंद्र विक्रम सिंह और एडीजी जोन भी मौके पर पहुंचे।
बचाव कार्य में बढ़ीं चुनौतियां
बाढ़ खंड के एक्सईएन एमके सिंह ने बताया कि लगातार बारिश से खेतों में पानी भरा है, जिससे मिट्टी नहीं मिल रही है। यदि मिट्टी मिलती भी है तो उसे करीब दस किलोमीटर दूर से लाना पड़ रहा है। तटवर्ती गांवों में बाढ़ का पानी आने से मजदूरों की कमी हो गई है। ठेकेदारों से दस मजदूर मांगे गए, लेकिन उन्होंने केवल दो मजदूर दिए, जिससे सीपेज के कार्यों में तेजी नहीं आ पाई।
संसाधनों और तैयारी पर उठ रहे सवाल
पांच से अधिक जेसीबी मशीनें लगाई गई हैं। तटबंध टूटने के बाद अधिकारी मौके पर पहुंचे और बचाव कार्य शुरू कराया। शुरुआती कटान को रोकने के लिए बड़े बोल्डर, भारी मशीनरी और पर्याप्त संसाधनों की उपलब्धता पर सवाल उठ रहे हैं। दिनभर रिसाव और कटान की स्थिति सामने आई, लेकिन रात में आपात स्थिति की तैयारी पर भी सवाल उठाए गए हैं।