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Kushinagar News: कर्ज बांटने में सारी हदें पार...बना रहे फर्जी वोटर और आधार

Sat, 28 Dec 2024 12:24 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
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पडरौना/दुदही। जिले की अंतिम छोर पर बसे इलाकों में फैली मजबूरी और अशिक्षा का लगातार कर्ज बांटने वाले एजेंट और समूह फायदा उठा रहे हैं। कर्ज बांटने के लिए विभिन्न माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के कर्मचारी सारी हदें पार कर दे रहे हैं। एक आधार से रुपये निकालने के बाद और भी कई आधार कार्ड और वोटर आईडी बनाकर एजेंट कर्ज बांट रहे हैं। इन फर्जी कागजात को बनवाने में पांच सौ रुपये तक वसूली जा रही है। हाल ही में कुछ ऐसा ही मामला विशुनपुरा थाना क्षेत्र के जंगल नौगांवा में आया है। इस प्रकरण में एक व्यक्ति के नाम से तीन आधार एवं दो वोटर आईडी कार्ड बनाकर माइक्रो फाइनेंस कंपनी से कर्ज लिया गया है। यह एक फर्जीवाड़ा तो बानगी मात्र है। पुलिस और प्रशासन अगर अभियान चलाकर इन इलाकों में जांच कर कार्रवाई करें तो बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हो सकता है।
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दुदही का इलाका दियारा क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। इन इलाकों में बेबस मजबूर और आश्रित महिलाओं की संख्या अधिक है, जिन्हें दैनिक दिनचर्या के लिए कर्ज की जरूरत पड़ती है। इन सीमांत इलाकों में फैली बेबसी का फायदा उठाकर सक्रिय तमाम फाइनेंस कंपनियों के कर्मचारी कर्ज देने के लिए किसी भी हद को पार कर जाते हैं। बता दें कि विभिन्न माइक्रो फाइनेंस कंपनियों की कर्मचारियों ओर से कर्ज वितरण के लिए खूब फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। गांव में समूह अलग-अलग टीम लीडर के माध्यम से फर्जीवाड़े को अंजाम दे रहे हैं। एक महिला या पुरुष को कई दफा कर्ज देने के लिए कई-कई आधार कार्ड व वोटर आईडी कार्ड बना जा रहा है। दरअसल, लोगों को कर्ज की जरूरत के अनुसार फाइनेंस कर्मचारी का ध्येय यह होता है कि कैसे भी वह महिलाओं को कर्ज देकर पांच सौ वसूल लें। चाहे इसके लिए किसी भी स्तर के फर्जी कागजात बनाने पड़े। क्योंकि कर्ज के बाद भी इन्हें फायदा होता है। इस प्रकार नाम बदल कर 10-10 माइक्रो फाइनेंस कंपनियों की ओर से कर्ज दिया जा रहा है। विशुनपुरा थाना क्षेत्र के जंगल नौगांवा समेत विभिन्न गांवों में में यह फर्जीवाड़ा किया गया है।
हर गांव में महिलाएं शिकार
वहीं समूह के कर्ज की वजह से गांव की महिलाएं कर्ज के दलदल में फंसती जा रही हैं। कहीं पति-पत्नी में तकरार हो रही है तो कहीं मारपीट तो कहीं हत्या तक मामला पहुंच जा रहा है। कोई ऐसा गांव नहीं है, जहां गांव के 10 से 20 परिवार कर्जदार न हों। ऐसे परिवार मानसिक प्रताड़ना के बाद तो कर्ज नहीं चुकाने पर घर-द्वार छोड़ कर पूरे परिवार के साथ कही दूर चले गए हैं। वहां जाकर दर-दर की ठोकर खा रहे हैं। बच्चों की पढ़ाई नहीं हो पा रही है।
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सीओ अमित सक्सेना ने बताया कि फर्जीवाड़ा कर माइक्रो फाइनेंस कंपनियों से ऋण दिलाने वालों के नेटवर्क को खंगाला जा रहा है। शिकायत मिलने पर उसकी स्टडी कराई जा रही है। बहुत जल्द फर्जीवाड़े से जुड़े मामले में कार्रवाई होगी।
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एक नजर इन घटनाओं पर
केस नंबर एक
-जंगल नौगांवा की नूरऐसा पत्नी अलाउद्दीन ने बताया कि एक माइक्रो फाइनेंस के कर्मचारी जिसका नाम सुनील है। उसने 400 रुपये लिए और वोटर कार्ड बना दिया। इतना करने के बाद लोन भी नहीं दिया। जब उसकी जांच कराई तो उसे फर्जी बताया गया। बाद में उसने हठ पकड़ी और पुलिस से शिकायत की बात कही तो 400 रुपये वापस किया और आईडी जला दी। इस तरह की गांव की कई महिलाओं के साथ फर्जीवाड़ा हुआ है।


केस नंबर दो

-जंगल नौगांवा की नजमा खातून ने 50 हजार कर्ज उठा कर एक पड़ोसन को दे दिया। पड़ोसन पैसा लेने के बाद रफू-चक्कर हो गई। फिर माइक्रो फाइनेंस कंपनी वाले नजमा के साथ दुर्व्यवहार करने लगे। एक बार पंखा, दूसरी बार सिलेंडर और तीसरी बार राशन बेचवा कर किस्त ले गए। फिर प्रताड़ित करने लगे तो उसे अपनी च डिसमिल जमीन बेचनी पड़ी। मानसिक प्रताड़ना का शिकार नजमा कहतीं है कि प्रशासन को इस मामले में पूरी जांच करानी चाहिए।
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