पडरौना। करोड़ों रुपये खर्च के बाद भी लोगों को इस गर्मी में ओवरलोड से निजात नहीं मिलने वाली है। विद्युत वितरण उपकेंद्र पडरौना से जुड़े शहर और गांवों में बीते वर्ष दर्जनों ट्रांसफाॅर्मरों की क्षमता वृद्धि के बावजूद उपकेंद्र की क्षमता वांछित लोड के मुकाबले नहीं बढ़ सकी है।
विद्युत वितरण उपकेंद्र पडरौना में करीब 1.45 करोड़ रुपये की लागत से जो पांच एमवीए का नया ट्रांसफाॅर्मर लगाया जाना है, वह काम चार महीने बाद शुरू होने की संभावना है। वहीं 33 केवी मेन लाइन की दूसरी सप्लाई रामधाम विशुनपुरा/132 केवी न्यू पडरौना बिजली घर से आनी थी। इस योजना पर बिजली निगम 2.85 करोड़ खर्च कर रहा है। इसका 90 फीसदी काम पूरा हो चुका है, लेकिन रेलवे की एनओसी नहीं मिलने के कारण काम रुका हुआ है।
ये दोनों काम इस गर्मी में पूरे होने संभव नहीं दिख रहे। विभागीय उदासीनता के कारण इस काम में देरी हो रही है। गर्मी में पडरौना उपकेंद्र पर औसतन लोड करीब 1085 एंिपयर का होता है, जबकि दोनों पॉवर ट्रांसफाॅर्मरों की क्षमता करीब 836 एंिपयर हैं। अगर मेन लाइन में फॉल्ट हुआ तो मरम्मत के बाद एकाएक सप्लाई देने पर लोड 1300 एंिपयर के पार पहुंच जाता है। ऐसे में ओवरलोड से बिजली के तार तड़तड़ाने लगते हैं।
इस बार भी लोगों को ऐसी ही समस्याओं से जूझना पड़ेगा। ओवरलोड के कारण कटौती और फाॅल्ट के कारण इस गर्मी में लोगों को बिजली फिर रुलाएगी। गर्मी के मौसम में पंखे, कूलर, फ्रीज और एयर कंडीशनर का उपयोग होने लगता है, जिससे बिजली की मांग बढ़ जाती है। इस साल गर्मी शुरू होते ही इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकानों से बड़े पैमाने पर पंखे, कूलर, फ्रीज और एयर कंडीशनर की खरीदारी हुई है। जबकि उपकेंद्र की क्षमता पहले जैसी ही है। वांछित लोड के मुकाबले उपकेंद्र की क्षमता कम होने से लोगों को बार-बार फाॅल्ट, ट्रिपिंग व लो-वोल्टेज की समस्या से जूझना पड़ेगा। पडरौना उपकेंद्र के दोनों पॉवर ट्रांसफार्मरों की क्षमता 1046 एंिपयर है, जिन्हें 80 प्रतिशत क्षमता यानी कि 836.80 एंिपयर पर संचालित किया जा सकता है, जबकि गर्मी में औसतन लोड 1085 एंिपयर है। वहीं मेन लाइन में फाॅल्ट आने की स्थिति में मरम्मत होने के बाद जब सप्लाई बहाल की जाती है तो उस समय लोड सवा गुना हो जाता है जो करीब 1356 एंिपयर तक पहुंच जाता है।
लोड बढ़ने पर शहर के विभिन्न हिस्सों में धड़ाधड़ फाॅल्ट होने लगते हैं। कर्मचारियों की कमी से जूझ रहे उपकेंद्र को जगह-जगह जाकर मरम्मत करना मुश्किल होता है।