दुर्गाशंकर मिश्र
पिपरा बाजार। खजुरिया गांव में शुक्रवार की दोपहर आग त्रासद रूप ले गई। कई परिवारों की सारी जमा पूंजी, राशन आदि सामान राख हो गए। गांव की चार बेटियों का ब्याह है। शादी की तैयारी पूरी थी, लेकिन आग ने इस पर भी पानी फेर दिया। कुछ महीने पहले आई वधुएं आग के चलते खुले आसमान के नीचे रात गुजारने के लिए मजबूर हो गई हैं।
दो जवान और बेसहारा विधवा भी हैं जिनके सिर जिम्मेदारियां तो बड़ी हैं, लेकिन आग ने सारे संसाधन छीन लिए हैं। घरों की राख अग्निपीड़ितों के आंसुओं से ठंडी हो रही है। नेबुआ नौरंगिया थाना के खजुरिया गांव के टोला-एक में लगी आग में शुक्रवार को 100 से अधिक घर जल गए थे। गांववालों और अग्निशमन दस्ते के साथ किसी तरह देर शाम आग पर काबू पाया था।
शनिवार सुबह गांव में हर तरफ राख, कपड़े, रजाई- गद्दों के अधजले टुकड़े, सुलगा अनाज, आग बुझाने की कोशिश में पानी फेंकने से बना कीचड़ और दुर्गंध भरी हुई थी। आग की लपटों ने पेड़-पौधों तक को छाया देने के काबिल नहीं छोड़ा है। लिहाज़ा पीड़ित बिना छत की दीवारों पर प्लास्टिक की पन्नी अथवा खेतों में अस्थायी रूप से बनाई गई टाटी की छांव में गर्मी से राहत पाने की कोशिश करते नजर आए। दोपहर में राख की ढुलाई के लिए एक ट्रैक्टर ट्राली गांव के बाहर खेत में खड़ी की गई थी, धूप से व्याकुल कुछ बच्चे उसकी ही छांव में बैठे हुए दिखे।
पूर्व प्रधान सुरेश राय, पूर्व प्रधान राजकुमार चौहान, पूर्व प्रधान दु:खी प्रसाद, शेरबहादुर मिश्र, डॉ. सत्यप्रकाश मिश्र आदि का कहना है कि आग लगने से बहुत सी गृहस्थियां तबाह हो गई हैं। गेहूं की फ सल काटने के बाद लोगों ने अपने घरों में अनाज सहेज कर रखा था। आग ने गेहूं के साथ पहले से घर में रखे धान, चावल, सरसों को भी राख बना दिया। अगिभनपीड़ित यह सोचकर परेशान हैं कि आने वाले दिनों में दो जून की रोटी कैसे मिलेगी।