महिला थानाध्यक्ष ने सभी को हिरासत में ले लिया।
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कुशीनगर। बुधवार को कुशीनगर से आई तीन महिलाओं ने अराजकता की सभी हदें पार कर दीं। अपने पिता की संपत्ति में बराबर का हिस्सा दिलाने के लिए कमिश्नर पर दबाव बनाया। जब कमिश्नर ने यह कहकर पल्ला झाड़ा कि वह इसमें कुछ नहीं कर सकते यह मामला दीवानी का है तो वह नाराज हो गई।
पहले से ही पूरी तैयारी से आई महिलाओं ने झोले में रखे मैला के बोतल को कार्यालय के बाहर और उनकी गाड़ी पर फेंक दिया। जब सुरक्षा गार्ड उसे रोकने की कोशिश की तो उन पर भी फेंकने के लिए आगे बढ़ी। जिसे देख सुरक्षा गार्ड भाग खड़े हुए। दो घंटे तक चले हंगामे के बाद पहुंची महिला थानाध्यक्ष ने सभी को हिरासत में ले लिया।
कुशीनगर के हनुमानगंज थानाक्षेत्र के बुलहवा गांव निवासी मूरत की तीन बेटियां हैं। मूरत ने अपनी बड़ी बेटी कुरैश को अपनी जमीन और मकान दे दिया। इससे नाराज उनकी दो अन्य बेटियां माला और मूरत ने थानाध्यक्ष हनुमानगंज से गुहार लगाई। उनका आरोप है कि थानाध्यक्ष ने उनकी फरियाद नहीं सुनी।
दोनों बहने कुशीनगर के जिलाधिकारी के पास गई, पर उन्होंने यह कह कर कुछ करने से मना कर दिया कि जब उनके पिता ने ही अपनी बेटी को सब दे दिया तो वह क्या कर सकते हैं। माला और मूरत का कहना है कि वह लोग कुछ रोज पहले कमिश्नर कार्यालय पर अपने हक के लिए धरना दिया था।
तब कमिश्नर ने मामले के निस्तारण के लिए एसडीएम खड्डा को निर्देशित किया था, लेकिन थानाध्यक्ष हनुमानगंज ने मामले का निस्तारण नहीं होने दिया। बुधवार को माला और मूरत दोनो बहनों के साथ बुलहवां की पूर्व प्रधान साबिरा बेगम भी कमिश्नर कार्यालय पहुुुंची। उन्हें एक ज्ञापन दिया। जिसमें कहा कि थानाध्यक्ष उन लोगों मामला हल नहीं होने दे रहे हैं।
एक पेपर पर जबरन हस्ताक्षर करवा उन दोनों बहनों को पिता की जमीन से बेदखल कर रहे हैं। कमिश्नर से मांग किया कि पिता की जमीन जायदाद में तीनों बहनों का बराबर हिस्सा दिला दें। कमिश्नर ने उनकी बातों को सुनने के बाद कहा कि यह मामला दीवानी का है। वह इसमें कुछ नहीं कर सकते। इस पर महिलाएं बाहर आते ही मैला फेंकने लगीं। पुलिस को सूचना देने के बाद भी दो घंटे आने में लग गए।