कुशीनगर। कसया थाना क्षेत्र के मल्लूडीह के पास से 32800 रुपये के नकली नोट के साथ पकड़े गए युवकों के बारे में जानकर आराजी कोटवा गांव के लोग भी सकते में हैं। इस गांव के दो युवक आरोपों के घेरे में हैं। इनके बेहिसाब खर्च को देखकर हर कोई यही सोचता था कि आखिर उनके पास इतने रुपये कहां से आ रहे हैं। लोगों को यह मालूम ही नहीं था कि ये जाली नोट का धंधा कर रहे हैं। दूसरी तरफ पुलिस जाली नोट के अन्य धंधेबाजों के बारे में भी जांच-पड़ताल कर रही है।
रविवार को पुलिस ने नकली नोट के जिस रैकेट का खुलासा किया था, उसमें शामिल तीनों युवक जनपद के पटहेरवा थाना क्षेत्र के ही निवासी हैं। उनमें दो युवक निजामुद्दीन और सलाउद्दीन तो आराजी कोटवा गांव के ही निवासी हैं, जबकि तीसरा अजहरुद्दीन अंसारी कोटवा गांव का रहने वाला है। इनके पास से पुलिस ने 32800 रुपये के नकली नोट के अलावा पेपर कटर, प्रिंटर, नोट छापने के 11 पेपर और बाइक बरामद की थी। खुद एसपी ने बताया था कि पांच हजार रुपये की असली करेंसी के बदले 15 हजार रुपये के नकली नोट देते थे। इनका नेटवर्क बिहार के अलावा गोरखपुर और बस्ती मंडल में भी फैला हुआ है। सोमवार को यह खबर अखबारों में आने के बाद गांव के लोग भी इन युवकों की हरकतों से वाकिफ हुए। गांव में यही चर्चा थी कि इनके बेहिसाब खर्च को देखकर लोगों के मन में यह आशंका बनी रहती थी कि इनके पास इतने रुपये कहां से आ रहे हैं। चर्चा थी कि इनके धंधे में लक्ष्मीपुर महंथ, रससू जनोबीपट्टी, नदवा विशुनपुर सहित कुछ अन्य गांवों के लोग में भी शामिल हो सकते हैं, जिनके साथ यह अपना समय गुजारते थे। अगर पुलिस उनके साथ सख्ती से पेश आए तो कुछ और लोगों के चेहरे से पर्दा हट सकता है। जाली नोट अक्सर सौ रुपये की शक्ल में होते थे।
इस संबंध में एसपी यमुना प्रसाद का कहना था कि तीनों युवकों की निशानदेही पर बरामद किए गए नोट 100, 500 और 200 रुपये की शक्ल में थे। जाली नोट के धंधेबाजों के खिलाफ अभी कार्रवाई शुरू की गई है। पूछताछ और छानबीन में जो भी नाम आएंगे, उनके खिलाफ भी जांच की जाएगी।