कसया। बुद्ध स्थली स्थित श्रीलंका बुद्ध विहार में आयोजित सात दिवसीय श्रामणेर प्रब्बज्जा शिविर का समापन बौद्ध धर्म के प्रसार और जन कल्याण के संकल्प के साथ हुआ।
शिविर के सातवें दिन शुक्रवार को सुबह प्रशिक्षण के पूर्व नव भिक्षुओं ने बुद्ध प्रतिमा और अशोक स्तूप के समक्ष धम्म वंदना के साथ पूजन किया। अपने गुरु के निर्देशन में नव श्रामणेर बने 25 भिक्षु जो चीवर अपने शरीर पर धारण किया था उसे उतार कर नए वस्त्र धारण किए और गृहस्थ जीवन में लौट आए। मुख्य आयोजक, बुद्ध बिहार के प्रमुख, भिक्षु संघ कुशीनगर के सचिव और पूर्व उपाध्यक्ष अंतराष्ट्रीय बौद्ध संस्थान भंते डा नंद रतन महाथेरों ने सभी श्रामणेर को अपनी शुभकामनाएं दी। कहा कि
आपने पूरे मनोयोग से शिविर में भाग लेकर धम्म ज्ञान प्राप्त किया। बुद्ध ने विश्व को करुणा, मैत्री, शांति और अनुशासन का पाठ पढ़ाया। तथागत बुद्ध के पंचशील और अष्टांगिक मार्ग के सिद्धांत में ही कल्याण है। सभी भिक्षुओं और उपासक का कर्तव्य बनता है कि भगवान बुद्ध की शिक्षाओं का जन कल्याण के लिए विश्व में प्रसार करें। सातों दिन प्रतिभागियों को बौद्ध धर्म का अध्ययन, उपासना विधि, ध्यान-साधना, श्रामणेर भिक्षुओं की दैनिक दिनचर्या, पंचशील और आर्य अष्टांगिक मार्ग का व्यावहारिक ज्ञान दिया गया।।इस अवसर पर सह- आयोजक भंते सुमेध थेरो, डॉ. भिक्षु तेजेंद्र, इंद्र श्री, सहित नवभिक्षु और उपासक मौजूद रहे।