पडरौना। जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय के फर्जीवाड़ा का खुलासा हुआ है। लिपिकों ने डीआईओएस के फर्जी हस्ताक्षर से तैयार पत्रावली को मंजूरी को जेडी कार्यालय भेज दिया था। इसको गंभीरता से लेते हुए संयुक्त शिक्षा निदेशक गोरखपुर की जांच में यह मामला सामना आया तो विभाग में हड़कंप मच गया।
सूत्रों की मानें तो यदि निष्पक्ष जांच हो तो इस तरह के फाइलों में बंद अभी और मामले खुल सकते हैं, इसमें डीआईओएस कार्यालय में तैनात कई बाबुओं की गर्दन फंस सकती है। विभागीय जिम्मेदार जांच के बजाए मामले को दबाने में जुटे हैं।
संयुक्त शिक्षा निदेशक ने जिला विद्यालय निरीक्षक की तरफ से दिए गए जांच के आदेश के अनुसार जनता इंटर कॉलेज रामकोला से पिछले 10 जून 2024 को पत्रावली प्राप्त हुई। उसमें सहायक अध्यापक रामअवध कुमार यादव अंग्रेजी प्रवक्ता रामेश्वर मिश्र की 24 अगस्त 2023 को मृत्यु होने की दशा में प्रवक्ता पद पर पदोन्नति और विद्यालय के सहायक अध्यापक मुकेश कुमार सहायक को ओमप्रकाश मिश्रा प्रवक्ता इतिहास के 31 मार्च 2028 को सेवानिवृत्त होने पर पदोन्नति करने की बात कही गई थी।
इस मामले में डीआईओएस कार्यालय से पत्रावली जेडी कार्यालय पहुंचने पर उन्होंने तत्कालीन डीआईओएस रवींद्र कुमार सिंह से वार्ता कर पूरे मामले की जानकारी ली तो पता चला कि उन्होंने इस तरह का कोई पत्रावली भेजी ही नहीं है। इस मामले में डीआईओएस ने बीते 26 दिसंबर 2024 को जेडी को पत्र लिखकर बताया कि जनता इंटर कॉलेज रामकोला के दो शिक्षक पदोन्नति संबंधित पत्रावली उनके फर्जी हस्ताक्षर से भेजी गई है। उन्होंने संदेह जताया कि आगामी 31 दिसंबर को रिटायर होने के बाद किसी संस्था व व्यक्ति को लाभ पहुंचाने के लिए फर्जी हस्ताक्षर से पत्रावली भेजी जा सकती है। ऐसे में पत्रावलियों की हर हाल में सत्यापन करा लिया जाए, जिससे फर्जीवाड़े से बचा जा सके।
इसके बाद संयुक्त शिक्षा निदेशक गोरखपुर ने 30 दिसंबर को जिला विद्यालय निरीक्षक कुशीनगर को दोनों शिक्षकों की मूल पत्रालियों को वापस करते हुए पूरे प्रकरण की जांच कर दोषी के खिलाफ नियमानुसार विधिक कार्रवाई करके अवगत कराने के निर्देश दिए। जेडी की तरफ से पत्रावली भेजकर जांच के निर्देश मिलने पर कार्यालय में हड़कंप मचा है।
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