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सिर्फ नाम की बची थी हिरण्यवती: अब DM, जनता और सफाईकर्मी मिलकर लौटा रहे अविरल धारा- रोज होगी सफाई

Thu, 21 May 2026 02:19 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर

सार

डीएम महेंद्र सिंह तंवर ने बताया कि हिरण्यवती के पुनर्जीवित होने से कुलकुला देवी मंदिर की सुंदरता बढ़ेगी और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। वन क्षेत्र में पौधरोपण होगा। पर्यटकों के लिए मंदिर परिसर में प्रकाश, पेयजल और बिजली की व्यवस्था की जाएगी।
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हिरण्यावती नदी की साफ-सफाई करने में जुटे जिला प्रसाशन व अन्य।स्रोत-सोशल मीडिया
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विस्तार
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बौद्धकालीन इतिहास से जुड़ी हिरण्यवती नदी को पुनर्जीवित करने की कवायद एक बार फिर तेज हो गई है। डीएम डॉ. महेंद्र सिंह तंवर के नेतृत्व में बुधवार को सफाई अभियान चलाया गया। बढ़ी संख्या में क्षेत्रीय लोगों और सफाई कर्मियों ने लगभग 200 मीटर तक नदी की सफाई की।
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कुलकुला देवी मंदिर के पास डीएम ने सफाई अभियान का जायजा लिया और लोगों को नदी संरक्षण के लिए जागरूक किया। उन्होंने कहा कि यदि यह प्रयास सफल रहा तो मृतप्राय हो चुकी हिरण्यवती नदी कुछ ही दिनों में फिर से बहती नजर आएगी।

प्रशासन का प्रयास है कि बरसात शुरू होने से पहले अधिकतम हिस्से की सफाई पूरी कर ली जाए। जरूरत पड़ने पर जेसीबी मशीनों की भी मदद ली जाएगी। डीएम ने कहा कि हिरण्यवती नदी के पुनर्जीवित होने से कुलकुला देवी मंदिर की सुंदरता बढ़ेगी और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

वन क्षेत्र में जमीन चिन्हित कर पौधरोपण कराया जाएगा। साथ ही पर्यटकों की सुविधा के लिए मंदिर परिसर में प्रकाश, पेयजल और बिजली की व्यवस्था भी की जाएगी। उन्होंने बताया कि त्रिमुहानी घाट तक नदी की सफाई कराने की योजना है, जिसे प्रशासन और जनसहयोग से पूरा किया जाएगा।

श्रमदान करते डीएम - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पर्यटन विभाग से संपर्क कर मंदिर के सुंदरीकरण के साथ हिरण्यवती नदी पर पुल निर्माण का प्रस्ताव भी तैयार कराया जाएगा। इस दौरान एसडीएम डॉ. संतराज सिंह बघेल, डीपीआरओ आलोक प्रियदर्शी, तहसीलदार धर्मवीर सिंह, नायब तहसीलदार संदीप कुमार यादव, वीडीओ आरके सेठ, सचिव नीरज चतुर्वेदी ब्लॉक के सफाई कर्मी एवं ग्रामीण मौजूद रहे।
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हिरण्यवती नदी का अस्तित्व नाममात्र का
कुलकुला देवी मंदिर के पास से बहने वाली हिरण्यवती नदी का अस्तित्व अब केवल नाममात्र रह गया है। जलस्रोत बंद होने से अधिकांश समय नदी सूखी रहती है। केवल बरसात में आसपास के खेतों और ड्रेनों का पानी आने पर ही इसमें जल प्रवाह दिखाई देता है। नदी का अधिकांश हिस्सा झाड़-झंखाड़ से पटा है। अविरल प्रवाह पुनरुत्थान न्यास के संयोजक साकेत कुमार मिश्रा ने बताया कि नदी की सफाई प्रतिदिन जारी रहेगी। उन्होंने लोगों से भी इस अभियान में सहयोग करने की अपील की।
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