प्रशासन का प्रयास है कि बरसात शुरू होने से पहले अधिकतम हिस्से की सफाई पूरी कर ली जाए। जरूरत पड़ने पर जेसीबी मशीनों की भी मदद ली जाएगी। डीएम ने कहा कि हिरण्यवती नदी के पुनर्जीवित होने से कुलकुला देवी मंदिर की सुंदरता बढ़ेगी और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
वन क्षेत्र में जमीन चिन्हित कर पौधरोपण कराया जाएगा। साथ ही पर्यटकों की सुविधा के लिए मंदिर परिसर में प्रकाश, पेयजल और बिजली की व्यवस्था भी की जाएगी। उन्होंने बताया कि त्रिमुहानी घाट तक नदी की सफाई कराने की योजना है, जिसे प्रशासन और जनसहयोग से पूरा किया जाएगा।
पर्यटन विभाग से संपर्क कर मंदिर के सुंदरीकरण के साथ हिरण्यवती नदी पर पुल निर्माण का प्रस्ताव भी तैयार कराया जाएगा। इस दौरान एसडीएम डॉ. संतराज सिंह बघेल, डीपीआरओ आलोक प्रियदर्शी, तहसीलदार धर्मवीर सिंह, नायब तहसीलदार संदीप कुमार यादव, वीडीओ आरके सेठ, सचिव नीरज चतुर्वेदी ब्लॉक के सफाई कर्मी एवं ग्रामीण मौजूद रहे।
हिरण्यवती नदी का अस्तित्व नाममात्र का
कुलकुला देवी मंदिर के पास से बहने वाली हिरण्यवती नदी का अस्तित्व अब केवल नाममात्र रह गया है। जलस्रोत बंद होने से अधिकांश समय नदी सूखी रहती है। केवल बरसात में आसपास के खेतों और ड्रेनों का पानी आने पर ही इसमें जल प्रवाह दिखाई देता है। नदी का अधिकांश हिस्सा झाड़-झंखाड़ से पटा है। अविरल प्रवाह पुनरुत्थान न्यास के संयोजक साकेत कुमार मिश्रा ने बताया कि नदी की सफाई प्रतिदिन जारी रहेगी। उन्होंने लोगों से भी इस अभियान में सहयोग करने की अपील की।