खड्डा क्षेत्र में बढ ता( शंखमुख) सारस का कुनबा,पर्यावरण के लिए सुखद।संवाद
पडरौना। कोविड काल के बाद खड्डा की आबोहवा राजकीय पक्षी सारस को भाने लगी है। यही वजह है कि पिछले पांच साल में यहां सारस का परिवार लगातार बढ़ रहा है। वन विभाग की गिनती के मुताबिक, साल 2021 में पूरे जिले में सिर्फ 15 सारस थे, वहीं अब इनकी संख्या 50 के पार पहुंच गई है।
जिले के तालाब व शांत इलाके अब सारस पक्षियों के पसंदीदा ठिकाने बन गए हैं। वन विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार सारस की आबादी में बंपर उछाल आया है। वर्ष 2021 में 2025 के बीच पांच वर्षों में इनकी संख्या तीन गुने से भी ज्यादा 15 से बढ़कर अर्धशतक के पार पहुंच चुकी है। पर्यावरण के जानकार इसे जिले के लिए सुखद मान रहे हैं।
जिले में यहां है सारस पक्षियों का केंद्र : जिले में कुछ खास इलाके सारस के मुख्य केंद्र बने हुए हैं। जलभराव वाले क्षेत्र, प्राकृतिक झीलें और गन्ने के शांत खेत इनकी पहली पसंद हैं। वन विभाग अब जिले के इन प्रमुख स्थलों की विशेष निगरानी कर रहा है, ताकि इनके प्राकृतिक आवास से कोई छेड़छाड़ न हो। सारस पाए जाने वाले स्थलों में जिले का सिंगहा ताल, खैरी ताल, मथौली,मंगलपुर, सहजौली, टीकर, महुई, बेलवा बुजुर्ग, देव पोखर, कुसम्हा, लवकुश पूरब पट्टी, रामबर बुजुर्ग व रोहुआ ताल क्षेत्र में सारस पाए जा रहे हैं।