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Kushinagar News: दालचीनी में चीनी बिली लीफ, जीरे में घास और सोया मिला रहे धंधेबाज

Wed, 22 Jan 2025 12:17 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
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पडरौना। जीरा में घास व सोया, काली मिर्च में पपीते के बीज और दालचीनी में चीन के बिली लीफ पौधे की छाल की मिलावट शुद्ध मसालों को नुकसानदेह बना रही है। हल्दी-लाल मिर्च में रंगों का इस्तेमाल सेहत के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। बाजार में बिक रही मिठाई, दाल में तो धड़ल्ले से मिलावट की ही जा रही है। वहीं, अब इन धंधेबाजों ने मसालों को भी नहीं छोड़ा है। हर खाने-पीने वाली चीजों में लागत से अधिक मुनाफा कमाने के लिए धड़ल्ले से मिलावट की जा रही है। इसकी पुष्टि खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की प्रयोगशाला से मिली मसालों की जांच रिपोर्ट में हुई है। विभाग की तरफ से प्रयोगशाला भेजे गए कुल छह नमूनों में से तीन अधोमानक मिले हैं। इनमें इतनी बारीकी से मिलावट की गई है कि उसकी पहचान आसान नहीं है।
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मसालों में सबसे ज्यादा उपयोग होने वाली हल्दी, मिर्च, धनिया, काली मिर्च, जीरा, दालचीनी आदि में सबसे ज्यादा मिलावट की जा रही है। मिर्च पाउडर में हानिकारक रंग की मिलावट कर बेचा जा रहा है। वहीं हींग में खुशबू वाला रसायन मिलाकर बाजारों में पहुंचा रहे हैं। इससे हींग बहुत उम्दा किस्म की मालूम पड़ती है, लेकिन कुछ समय बाद रसायन की महक उड़कर खत्म हो जाती है। वहीं, सूत्र बताते हैं कि सोया की डंठल और दक्षिण भारत से आने वाले एक घास को जीरा में मिलाने पर उसमें असली जीरा छांटना बेहद मुश्किल हो जाता है। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए घर-घर दालचीनी, शहद आदि का प्रयोग बढ़ा है। इसलिए बाजार में कुछ मसालों की मांग कई गुना बढ़ गई। इसी का फायदा अब धंधेबाज उठाकर इसमें भी मिलावट कर रहे हैं।
व्यापारी बताते हैं कि दो से तीन वर्ष पहले दालचीनी की खपत कम होती थी, लेकिन बीते दो-तीन वर्षों में इसकी खपत बढ़ गई है। सबसे बड़ा धंधा दालचीनी को लेकर चल रहा है। इसका आयात वियतनाम से होता है, लेकिन लोगों की मांग चीन की दालचीनी नेपाल के रास्ते लाकर पूरी की जा रही है। थोक में असली दालचीनी 600 रुपये किलोग्राम से अधिक के भाव बिकती है, जबकि नकली दालचीनी 200 से 300 रुपये प्रति किलो के भाव आती है। व्यापारियों के चीन के बिली लीफ पौधे की छाल एकदम दालचीनी जैसी होती है। ऊपर से देखने में इनमें फर्क करना मुश्किल है। बस इन्हें तोड़ने पर अंतर पता लगता है। असली दालचीनी का रंग हल्का भूरा होता है और आप जब इसे हाथ में लेते हैं तो रंग नहीं छूटता। मुताबिक सोया का डंठल और दक्षिण भारत के एक खास पौधे का छाल भी जीरे की तरह होती है। उसकी मिलावट कर व्यापारी ग्राहकों को धड़ल्ले से बेच रहे हैं।
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मिलावटी मसाले और उनके नुकसान
1. मिर्च पाउडर में ब्रिक पाउडर की मिलावट : ब्रिक पाउडर में लोहे के ऑक्साइड होते हैं, जो हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं।

- नुकसान : पाचन समस्याएं, उल्टी, दस्त।

- बचाव : मिर्च पाउडर को अच्छी तरह से जांचें और सुनिश्चित करें कि यह प्राकृतिक रूप से बनाया गया है।

2. हल्दी पाउडर में लेड की मिलावट : लेड एक जहरीला धातु है जो हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।

- नुकसान : मस्तिष्क की क्षति, पाचन समस्याएं, उल्टी।

- बचाव : हल्दी पाउडर को अच्छी तरह से जांचें और सुनिश्चित करें कि यह प्राकृतिक रूप से बनाया गया है।

3. धनिया पाउडर में स्टार्च की मिलावट : स्टार्च एक कार्बोहाइड्रेट है जो हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं है, लेकिन यह धनिया पाउडर के स्वाद और गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है।

- नुकसान : स्वाद और गुणवत्ता की कमी।

- बचाव : धनिया पाउडर को अच्छी तरह से जांचें और सुनिश्चित करें कि यह प्राकृतिक रूप से बनाया गया है।
बचाव के उपाय

1. मसालों को अच्छी तरह से जांचें : मसालों को खरीदने से पहले अच्छी तरह से जांचें और सुनिश्चित करें कि वे प्राकृतिक रूप से बनाए गए हैं।

2. प्रतिष्ठित ब्रांडों से खरीदें : प्रतिष्ठित ब्रांडों से मसाले खरीदना बेहतर होता है, क्योंकि वे अपने उत्पादों की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए प्रयास करते हैं।

3. मसालों को स्टोर करें : मसालों को स्टोर करने के लिए एयरटाइट कंटेनरों का उपयोग करें और उन्हें एक शुष्क और ठंडे स्थान पर रखें।

4. मसालों का उपयोग सावधानी से करें : मसालों का उपयोग सावधानी से करें और सुनिश्चित करें कि आप उन्हें सही मात्रा में उपयोग कर रहे हैं।

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ऐसे करें मिलावट की पहचान

लाल मिर्च पाउडर और हल्दी में कृत्रिम रंगों की मिलावट की जाती है। इसको पहचानने के लिए एक गिलास पानी में एक चम्मच लाल मिर्च पाउडर या हल्दी मिलाएं। यदि शुद्ध लाल मिर्च पाउडर कांच के तले में डूब जाएगा, जबकि मिलावटी मिर्च पाउडर पानी में तैरेगा।
शुद्ध हल्दी भी पानी में डूब जाएगी, लेकिन मिलावटी हल्दी पानी को पूरी तरह पीला कर देगी, जबकि असली हल्दी पानी में नीचे बैठ जाएगा और पानी का रंग हल्का पीला हो जाएगा।
काली मिर्च को पानी में मिलाते हैं, तो केवल वास्तविक शुद्ध काली मिर्च ही बर्तन के तल पर बैठेगी, जबकि अन्य पानी की सतह पर तैरेंगे।
थोड़ी सी हींग को कूटकर पानी में घोल लें। यदि हींग पानी में बिना कोई रंग छोड़े घुल जाए तो वह शुद्ध है।
पानी में शुद्ध नमक मिलाने से कोई तलछट या धुंधलापन नहीं रहेगा। ऐसा नहीं है, तो नमक में चाक मिला हुआ है।


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जनपद वासियों को शुद्ध खाद्य एवं पेय पदार्थ मिले, इसके लिए विभाग पूरी तरह गंभीर है। इस लिए खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच के लिए विभाग की तरफ से समय-समय पर जांच कर नमूना लिया जाता है। जांच के दौरान व्यापारी और मौजूद लोगों को मिलावट के सामान्य जांच के बारे में जागरूक भी किया जाता है। बीते महीनों में मसालों के छह नमूने मिले एकत्र कर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। प्रयोगशाला से मिले जांच रिपोर्ट में तीन अधोमानक मिले हैं। जिनके दुकान से अधोमानक मसाले मिले हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

- प्रदीप कुमार राय, सहायक आयुक्त, खाद्य सुरक्षा, द्वितीय।

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किसी भी तरह की मिलावटी खाद्य पदार्थों का सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। जीरा और दालचीनी समेत कई मसालों को आयुर्वेद में औषधि के रूप में उपयोग होता है। मिलावटी दालचीनी फायदा करने के बजाय सेहत को प्रभावित करने लगेगी। इसके सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने के बजाय घटने लगेगी। इसलिए लोगों को खाद्य सामग्री को लेकर सचेत रहने की जरूरत है।
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- डॉ. संजीव सुमन, चिकित्सा प्रभारी, पुरुष एवं नेत्र चिकित्सालय।
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