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Kushinagar News: कोडवर्ड में मिल रहा चीनी मांझा, बिक्री पर रोक लगाना चुनौती

Sat, 07 Feb 2026 12:27 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
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- पाबंदी के बावजूद बिक रहे मांझे, दुकानदारों पर कार्रवाई की तैयारी में प्रशासन, पतंग के थोक विक्रेताओं की होगी जांच


संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। एनजीटी और राज्य सरकार की पाबंदी के बावजूद बाजार में चीनी मांझा की बिक्री चोरी-छिपे जारी है। इसके पकड़े जाने के बाद भारी जुर्माने का भी प्रावधान है। इसके बाद भी कमाई के लालच में धंधेबाज इसे बेच रहे हैं। पूर्व में इससे हादसे भी हो चुके हैं, इसके बावजूद बिक्री पर रोक नहीं लग पा रही है। पुलिस इस दिशा में कार्रवाई की बात कह रही है, लेकिन इस पर रोक लगाना किसी चुनौती कम नहीं है।
आलम यह है कि पतंग उड़ाने का शौक राहगीरों के लिए मुसीबत बन गया है। पतंगबाजी के लिए बाजार में धड़ल्ले से चीनी मांझा बिक रहा है। प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती इसकी सप्लाई चेन है। यह धंधा अब दुकानों के फ्रंट काउंटर से हटकर गोपनीय गोदामों और घरों में सिमट गया है। इसके बिक्री में दुकानदार कोडवर्ड का उपयोग करते हैं। इसे मोनो या चाइना जैसे कोडवर्ड के जरिए केवल भरोसेमंद ग्राहकों को ही बेचते हैं। अब सोशल मीडिया के जरिए आर्डर लिए जाते हैं और होम डिलवरी तक की सुविधा दी जा रही है, जिसे ट्रैक करना पुलिस के लिए कठिन होता है।
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कोट,
सरकार की तरफ से मिले निर्देशों का पालन किया जाएगा। चीनी मांझा को लेकर लगातार अभियान जारी है। चीनी मांझा की बिक्री करने वालों को किसी भी दशा में बख्शा नहीं जाएगा।
- केशव कुमार, एसपी

शहर से गांव तक हो रही मांझे की बिक्री
पडरौना शहर के गुदरी बाजार, महावीरी गली, कसेरा टोली, रामलीला मैदान, साहबगंज सहित जिले के कस्बों जैसे हाटा, कसया, तमकुहीराज, खड्डा, कप्नातनगंज, सुकरौली, फाजिलनगर में चोरी-चुपके चीनी मांझे की बिक्री होती है। हालांकि अब इसकी बिक्री आसान नहीं होगी। प्रशासन ने सरकार के सख्त निर्देश के बाद रोकने के लिए कमर कस ली है। चीनी मांझे की बिक्री को लेकर पुलिस व प्रशासन दोनों मिलकर मांझा बेचने वालों की सूची तैयार करेंगे। कैमरों से शहरों के बीच निगरानी की जाएगी। पतंगबाजी के थोक केंद्रों पर जांच पड़ताल भी की जाएगी। चीनी मांझा पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई भी तत्काल तय की जाएगी।
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यातायात पुलिस करेगी जागरूक
यातायात निरीक्षक सत्यप्रकाश सिंह ने बताया कि चीनी मांझा का उपयोग नहीं करने के लिए लोगों को जागरूक किया जाएगा। इसमें चीनी मांझे के खतरे को साझा किया जाएगा। इससे मांझे की अवैध बिक्री के बारे में सूचनाएं भी जुटाएंगे। दोपहिया वाहन चालकों को पुलिस चौराहों पर पंफलेट बांटकर सवारों को हेलमेट का शीश नीचे रखने और गले में नेक गार्ड या मफलर पहनने की सलाह देगी। प्रमुख चौराहों पर लाउस्पीकर के माध्यम से लोगों को चीनी मांझे के कानूनी और जानलेवा परिणामों के बारे में बताएगी। स्कूली बच्चों के साथ सुरक्षित पतंगबाजी के लिए शपथ दिलाया जाएगा। बच्च इसमें बदलाव के बड़े वाहक हो सकते हैं।

क्या है चीनी मांझा
जानकारी के मुताबिक चीनी मांझे को नायलाॅन और मैटेलिक पाउडर से मिलाकर बनाया जाता है जो काफी लचीला होता है। पतंग के पेच लड़ाते समय यह आसानी से कटने के बजाय खिंचकर और बढ़ जाता है। साथ ही सामान्य डोर से बने मांझे से सस्ता होने के चलते भी लोग इसे खरीदते हैं। पतंग कटने के बाद यह मांझा पंछियों के साथ ही दो पहिया वाहन चालकों के हाथ और गले में फंसकर उन्हें घायल करता है। कई मामलों में तो इससे लोगों की जान भी चली जाती है।



सख्त कार्रवाई ही लगा सकती है बिक्री पर रोक

वर्ष 2017 में एनजीटी ने चीनी मांझे पर पाबंदी लगा दी थी। इसके बाद कहा गया था कि चीनी मांझा बेचने वालों के खिलाफ एनवायरमेंट प्रोटेक्शन एक्ट (पर्यावरण संरक्षण अधिनियम) के तहत कार्रवाई की जाए। यदि किसी के खिलाफ इस अधिनियम के तहत कार्रवाई होगी तो उसे पांच साल की सजा या एक लाख जुर्माना तक हो सकता है, लेकिन इस पर कार्रवाई नहीं की जाती है। इसकी एक वजह यह भी है कि कोई आगे आता नहीं और इसकी खरीद-फरोख्त करने वाले इसका फायदा उठाते हैं।






केस एक
30 दिसंबर 2024 को हाटा क्षेत्र के पड़री गांव के रहने वाले अभिषेक (25) के लिए सुकरौली ओवरब्रिज उस समय डरावना साबित हुआ, जब हवा में लटकते मांझे ने उनका गला काट दिया। 12 टांके और हफ्तों तक अस्पताल में गुजारने के बाद उनकी जान तो बच गई, लेकिन वो मंजर आज भी इलाके के बाइक सवारों को डरा देता है।


केस दो
जनवरी 2025 में फाजिलनगर क्षेत्र में मकर संक्रांति के उत्सव के बीच फाजिलनगर-पटहेरवा मार्ग पर एक युवक के चेहरे को मांझे ने काट दिया था। इससे घर की खुशियां पल भर में चीख-पुकार में बदल गईं।


केस तीन
फरवरी 2025 में पडरौना-रामकोला रोड पर एक साइकिल सवार की अगुंलियां इस डोर की धार का शिकार हो गईं। हड्डी तक पहुंची चोट ने यह साबित कर दिया कि यह केवल एक धागा नहीं, बल्कि एक बिना धार वाला चाकू है।
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पतंग व धागा विक्रेताओं ने कहा- सरकार के आदेश का होगा पालन
पडरौना शहर के धर्मशाला रोड महावीरी गली में पतंग व्रिकेता बंटी गुप्ता ने बताया कि चीनी मांझा की बिक्री प्रतिबंधित है। इसके बाद से यहां उसकी सप्लाई नहीं होती है। मौजूदा समय में दुकान में न तो पतंग है और न ही किसी तरह का धागा। चीनी मांझे को लेकर मकर संक्रांति के अवसर पर पुलिस की तरफ से अभियान चलाकर जांच की गई थी, लेकिन उन्हें कुछ नहीं मिला। अब दुकान पर पतंग भी नहीं रखा गया है। बच्चों के खिलौने आदि ही रखे गए हैं। इसके अलावा पतंग बेचने वाले दुकानदार चंदर जायसवाल ने कहा कि सरकार के आदेश का पालन किया जाएगा। कोई धागा जो खतरनाक हो सकता है, उसकी बिक्री नहीं की जा रही है।
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