कुशीनगर में चुनाव नजदीक आते की व्यापारियों की उम्मीदें परवान चढ़ने लगी हैं। इन दिनों सर्दी के मौसम में चर्चाओं का बाजार गर्म है। इस बार चुनाव में कैसी सरकार हो, कैसा प्रत्याशी हो, इस पर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। व्यापारियों का कहना है कि महंगाई काफी बढ़ चुकी है, जो भी प्रतिनिधि चुनकर आए वह सदन में जाकर महंगाई को संज्ञान में लेते हुए मुद्दा जरूर उठाएं।
क्षेत्र के व्यापारियों का कहना है कि कोरोना ने व्यापार के स्वरूप को बदल दिया है। इस बदलते परिवेश में जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी पहले से और अधिक बढ़ गई है। कोरोना काल में लोगों के रोजगार छिन गए, दुकानें तक बंद हो गई। ऐसे में इस बार के जनप्रतिनिधि पर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध की जिम्मेदारी तो होगी ही। महंगाई, भ्रष्टाचार से भी लड़ने की जिम्मेदारी है। व्यवसायियों ने मूलभूत सुविधाओं की बात की। व्यापारिक घाटे को कम करने के लिए चलाई जा रही योजनाओं के विषय में भी बात की।
शहरी क्षेत्र के अनुपात में ग्रामीण इलाकों में विकास की भी बात की। जीएसटी कम कर महंगाई को काबू करने की उम्मीद भी जताई। उनका कहना था कि मतदान अनिवार्य रूप से सबको करना चाहिए। सबके मतदान करने से योग्य नेता ही चुनकर सदन तक पहुंचेगा। व्यवसायी ने एक स्वर में कहा कि समाज के हर वर्ग को मतदान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए। नेताओं के लोकलुभावन दावों से इतर धर्म, वर्ग, जाति आदि भेदभावों से ऊपर उठकर साफ-सुथरे, ईमानदार व अच्छे चारित्रिक गुणों वाले प्रत्याशियों को वोट करने की बात कही गई। सभी का मानना है कि प्रत्याशी शिक्षित हो, उसे क्षेत्र की समस्याओं के प्रति गहरी समझ हो, उसका संवेदनशील होना अनिवार्य है।
विकास कार्यों के मुद्दे पर मतदान करेंगे। व्यापारियों पर जीएसटी की मार पड़ रही है। किसानों को चार प्रतिशत पर लोन मिल जाता है, जबकि व्यापारियों को चौदह प्रतिशत पर लोन मिलता है। ऐसा भेदभाव व्यापारियों के साथ नहीं होना चाहिए। धर्म, जाति, मजहब से ऊपर उठकर वोट करेंगे। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, पानी, रोजगार व क्षेत्र के विकास में अहम भूमिका निभाने वाला विधायक होना चाहिए।
अरविंद सिंह, व्यापारी
ऑनलाइन व्यापार ने छोटे कारोबारियों का कमर तोड़ दिया है। जल्द ही इस पर सरकार कोई कारगर कदम नहीं उठाती है, तो छोटे व्यापारियों का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा। जीएसटी की सबसे बड़ी समस्या है, सरकार व्यापार को सरल बनाया तो अच्छा रहेगा।
-देव नारायण सिंह, व्यापारी
सरकार खाने का प्रबंध नहीं करती। दुकान में स्टॉक पड़ी है। लेकिन, कोई खरीदार नहीं है। पहले कोरोना से कमर टूटी तो अब जीएसटी सता रही है। विधायक ऐसा हो जो हमारी समस्याओं का स्थायी निराकरण करें।
कन्हैया सिंह, व्यापारी
व्यापारी ऐसे जनप्रतिनिधि को सदन तक पहुंचाएंगे। आवश्यक वस्तुओं की महंगाई कम करने के लिए सदन तक बात पहुंचाए। वर्तमान में व्यापारियों मध्यम वर्ग के लोगों की दशा सबसे खराब है। इस पर सरकार को सोचना चाहिए अर्थात बदलाव के लिए पूरा व्यापार संघ मन बना चुका है।
हरेंद्र सिंह, व्यापारी