छितौनी। नगर पंचायत छितौनी और आसपास के गांवों को बाढ़ की त्रासदी और जाम की समस्या से जल्द राहत मिलने की उम्मीद है। बौधी स्थान से एनएच 28बी को जोड़ना वाला पुराना रिंग बांध बाढ़ से क्षतिग्रस्त हो गया है। इसका पुनर्निर्माण के साथ विस्तार होगा। इसके लिए पहल शुरू हो गई है। इस परियोजना के तहत बांध पर 10 किलोमीटर लंबी पक्की सड़क का निर्माण होगा, जिससे छितौनी बाजार को जाम से मुक्ति मिलेगी और बाईपास सड़क के जरिए प्रस्तावित नारायणी कॉरिडोर से बाजार का सीधा जुड़ाव होगा।
इस सड़क के बन जाने से नरकहवा, बेलवनिया, दरगौली समेत एक दर्जन गांवों और नगर पंचायत छितौनी को बाढ़ से स्थायी राहत मिलेगी। साथ ही, प्राचीन बौधी स्थान मंदिर और नारायणी घाट के जुड़ाव से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, इससे स्थानीय लोगों में उत्साह है। पीडब्लूडी के जेई संतोष कुमार और उनके सहायक मेठ राजेश कुमार ने स्थानीय लोगों के साथ मौके पर निरीक्षण कर भौगोलिक स्थिति का जायजा लिया। जेई संतोष कुमार ने बताया कि निरीक्षण की विस्तृत रिपोर्ट विभाग को भेज दी गई है। विभाग के अनुसार, शासन ने 10 किलोमीटर की सड़क जिसमें पर्यटक स्थल शामिल हों, ऐसी परियोजना की मांग की थी। यह बांध इस मानक को पूरा करता है, क्योंकि सड़क बनने से बौधी स्थान मंदिर और नारायणी घाट सीधे जुड़ेंगे। विभाग अब इस मार्ग को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना बना रहा है, जिससे यात्रा सुगम होने के साथ-साथ पर्यटन की अपार संभावनाएं खुलेंगी। बड़ी गंडक (नारायणी) नदी की बाढ़ से छितौनी और आसपास के गांवों में फसलें नष्ट होती हैं और जनजीवन प्रभावित होता है। इस समस्या के समाधान के लिए खड्डा विधायक विवेकानंद पाण्डेय, सांसद विजय कुमार दूबे और मौर्य महासभा के ब्लॉक अध्यक्ष संदीप कुशवाहा ने प्रयास किए। संदीप कुशवाहा ने 12 अप्रैल को डिप्टी सीएम को पत्र सौंपकर सर्वे और निर्माण में तेजी लाने की मांग की थी। इसके बाद 21 अप्रैल को डीएम कुशीनगर को सर्वे का आदेश मिला, जिसके परिणामस्वरूप पीडब्लूडी ने सर्वे कार्य शुरू किया। इस सड़क पर 20 करोड़ से अधिक रुपये खर्च किया जाएगा। संजय सिंह, सुबास पहलवान आनंद कुशवाहा, संदीप कुशवाहा अजय रौनियार परियोजना को क्षेत्र के लिए वरदान मान रहे हैं। बांध और सड़क के निर्माण से बाढ़ की समस्या खत्म होगी, छितौनी बाजार का जाम हल होगा और नारायणी कॉरिडोर से जुड़ाव विकास को गति देगा। इसके अलावा, पर्यटन स्थल के रूप में बौधी स्थान और नारायणी घाट की पहचान क्षेत्र की आर्थिक समृद्धि को बढ़ाएगी। अब सभी की नजर इस परियोजना के शीघ्र कार्यान्वयन पर टिकी है।