बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा का जन्मदिन मनाया
कसया (कुशीनगर)। भारत-तिब्बत संवाद मंच की तरफ से मंगलवार को बौद्ध धर्म गुरु और तिब्बती समाज के शिखर पुरुष दलाई लामा का 86वां जन्मदिन विश्व शांति और संकल्प दिवस के रूप में मनाया गया। इस दौरान उनकी जीवनी पर चर्चा की गई।
भारत-तिब्बत सहयोग मंच के समन्वयक डॉ. संजय शुक्ल ने कहा कि तिब्बत आध्यात्मिक चेतना का केंद्र है। यह भारत के लिए सुरक्षा की दीवार है। चीन बुद्ध संस्कृति का विनाश करना चाहता है। विश्व के सभी बौद्ध अनुयायियों को एकजुट होकर चीन की इस नीति का विरोध करना चाहिए। भारतीय नागरिकों को चीन के सामान का परित्याग करना चाहिए। इससे चीन आर्थिक रूप से कमजोर हो सकेगा।
जिग्मे सुल्ट्रीन ने कहा कि 1950 के दशक में तिब्बत की अलग पहचान थी। वहां की संस्कृति व सभ्यता प्रसिद्ध थी। तिब्बत पूरी तरह स्वतंत्र राष्ट्र होना चाहिए। जिग्मे ने 60 वर्ष पूर्व नानी से सुनी बातों को भी साझा किया।
कुशीनगर विधायक रजनीकांत मणि त्रिपाठी ने कहा कि कश्मीर को आजादी तो मिल गई है। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ही तिब्बत चीन से मुक्त होकर स्वतंत्र होगा। कार्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के पूर्व अध्यक्ष भंते महेंद्र, डॉ. ममता मणि त्रिपाठी, वीरेंद्र कुमार तिवारी आदि ने संबोधित किया। इसके बाद कैलाश मानसरोवर मुक्ति, तिब्बत की आजादी व भारत की सुरक्षा का मंच ने संकल्प लिया। अतिथि परिचय डॉ. शुभलाल ने किया। अंत में आगंतुकों के प्रति तिब्बती मंदिर के लामा कौंगचाक तेनकियांग ने आभार जताया। कार्यक्रम का संचालन सुरेश गुप्त ने किया। इस मौके पर भंते अस्स जी महाथेरो, भंते नंदिका, भंते नंदरतन, भंते समित थेरो, डॉ. चंद्र शेखर सिंह, डॉ. रामप्रीत मणि त्रिपाठी, डॉ. वीना गुप्ता, डॉ. ज्योत्सना पांडेय, राजेश मणि त्रिपाठी, सुमित त्रिपाठी, अंबिकेश त्रिपाठी, विवेक गोंड आदि मौजूद रहे।