जौरा बाजार। क्षेत्र के कनौरा गांव में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का शुक्रवार को समापन हो गया। कथा में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथावाचक पं. वीरेंद्र तिवारी ने भरत चरित्र व भातृत्व प्रेम की कथा सुनाई। भरत का चरित्र समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया।
कथावाचक ने कहा कि भरत जैसा चरित्र भारतीय संस्कृति में विरले ही देखने को मिलता है। भरत ने अयोध्या का राजा बनने से इनकार कर दिया था,उनकी यह भातृत्व प्रेम, त्याग और मर्यादा आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। सत्ता, स्वार्थ और अहंकार से ऊपर उठकर धर्म और कर्तव्य को सर्वोपरि रखना ही सच्ची भक्ति है। भरत का चरित्र सच्चा प्रेम, त्याग और समर्पण की सीख देता है। मार्मिक कथा सुनकर पंडाल में बैठे श्रोताओं ने जय श्रीराम के जयकारे लगाए। इसके पूर्व धनहां निवासी रमेश राय, सुनील जायसवाल, शिव निषाद ने व्यासपीठ का पूजन कर कथा का शुभारंभ कराया।
कथा में कमलेश गोस्वामी,पारस यादव, नगई यादव, फारुख सिद्दीकी, जैनुद्दीन अंसारी, मुंद्रिका गौड़, पौहारी सिंह, हजरत अंसारी, जयकरन गिरी, दिलीप भारती, सुनील यादव, धनेश यादव, दिनेश यादव, पंचानंद निषाद, अरविंद मिश्र, कमला देवी , जटाशंकर गोस्वामी, राजन गोस्वामी, वाल्मीकि गोस्वामी, शांतनु शैलाब, विष्णु गोस्वामी, इंदू उपाध्याय,चंद्रशेखर पांडेय,डॉ. कन्हैया तिवारी, शब्बीर, विनोद गौड़, सुभाष गौड़, भगवती यादव, रमाशंकर गौड़, धर्मेंद्र यादव, मोतीलाल गौड़, जवाहिर गौड़, धनेश यादव आदि मौजूद रहे।