पकवा इनार। भदन्त एबी ज्ञानेश्वर के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार करने से एक दिन पहले 10 नवंबर को म्यांमार बुद्ध विहार में उनकी जयंती मनाई जाएगी। इस दौरान बौद्ध भिक्षुओं, उपासक, उपासिकाओं व बौद्ध धर्मावलंबियों को धम्म देशना दिया जाएगा। उनके बीच संघदान भी किया जाएगा।
इस अवसर पर बर्मा के प्रमुख संघ राजा, राजदूत और महावाणिज्य दूत मौजूद रहेंगे। करीब एक हजार बौद्ध भिक्षु, उपासक व अनुयायी साक्षी होंगे। भिक्षु संघ ने म्यांमार बुद्ध विहार में पूर्व चयनित अंतिम संस्कार स्थल की तैयारियां करीब पूरी कर ली गईं हैं।
भंते अशोक ने बताया कि कुशीनगर भिक्षु संघ ने गुरुजी के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार करने से पहले 10 नवंबर को म्यांमार बुद्ध विहार में धम्म सभा होगी। इसमें बौद्ध भिक्षुओं व श्रद्धालुओं को बुद्ध अनुकरणीय व अनुसरणीय उपदेशों को दिया जाएगा। वहीं संघदान भी किया जाएगा। यह कार्यक्रम सुबह आठ बजे से शुरू होगा। दोपहर दो बजे तक चलेगा। बताया कि इसमें वर्तमान में म्यांमार बौद्ध भिक्षु संघ के सर्वोच्च गुरु व संघराजा ज्ञानेश्वर धम्म देशना देंगे।
इस दौरान सभी बौद्ध भिक्षुओं को संघदान, चीवरदान करेंगे। इस क्षण के वर्मा के राजदूत जो ऊ और कोलकाता स्थित वाणिज्य दूतावास में तैनात महावाणिज्य दूत गवाह बनेंगे। 11 नवंबर को गुरुजी के पार्थिव शरीर की यात्रा बुद्ध विहार से मुख्य महापरिनिर्वाण मंदिर पहुंचेगी। यह परिक्रमा करते हुए मुख्य प्रवेश द्वार से होकर जेटी बाबू तिराहे से कसया के गांधी चौक, मुख्य बाजार, दीवानी न्यायालय से रामाभार स्तूप होते हुए बुद्ध विहार आएगी। यहां बौद्ध रीति रिवाजों व संस्कृति के अनुसार उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
भिक्षु संघ देगा मुखाग्नि
म्यांमार बुद्ध विहार में ही पूर्व से चयनित स्थल पर अंतिम संस्कार किया जाएगा। उन्हें पूरा कुशीनगर भिक्षु संघ एकजुट होकर मुखाग्नि देगा। भंते अशोक, भंते नंद रतन, भंते उपालि, रामनगीना सहित विहार से जुड़े लोग तैयारी में जुटे हैं।
बुद्ध पीजी कॉलेज के प्रवेश द्वार का होगा उद्घाटन
भंते अशोक ने बताया कि बुद्ध पीजी कॉलेज कुशीनगर में गुरुजी ने एक भव्य प्रवेश द्वार का निर्माण करवाया है। अपने 90वें जन्मदिवस पर 10 नवंबर को नवनिर्मित प्रवेश द्वार के उद्घाटन करने का विचार बौद्ध भिक्षुओं के बीच व्यक्त किया था। कुशीनगर भिक्षु संघ की ओर से प्रवेश द्वार का जन्मदिवस पर ही उद्घाटन किया जाएगा।