खुले में बिक रही मिलावटी चाय पत्ती।संवाद
पडरौना। जिले में मिलावटखोरी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की टीम भले ही खाद्य पदार्थों के नमूने एकत्र कर रही हो, लेकिन खुले में चायपत्ती बेचने वाले धंधेबाज बेखौफ हैं। बीते वित्तीय वर्ष में विभाग की तरफ से खुली चायपत्ती की बात तो दूर पैकेट वाली चायपत्ती के एक भी नमूने एकत्र नहीं किए गए। इसके चलते कई स्थानीय स्तर पर मिलावटी चायपत्ती के अलावा कई फुटकर दुकानदार भी धड़ल्ले से खुले में चायपत्ती बेच रहे हैं, लेकिन उसकी गुणवत्ता की जांच करने वाला कोई नहीं है। ऐसे में मिलावटी चायपत्ती के इस्तेमाल से सेहत को नुकसान पहुंच सकता है।
शहर के धर्मशाला रोड, गुदरबाजार, मेन बाजार के अलावा कसया, हाटा, कप्तानगंज, तमकुहीराज, दुदही, सेवरही और खड्डा समेत जिले अन्य छोटे बड़े कस्बों में खुले में चयपत्ती बेची जाती है। यही नहीं ग्रामीण क्षेत्र में छोटे पैकेट में बिक रहे चायपत्ती के पैकेट पर कंपनी का नाम तो स्पष्ट होता है, लेकिन उसकी पैकिंग और वैधता की तिथि स्पष्ट नहीं होती है।
लोग दुकानदार के विश्वास पर लेकर उपयोग करते हैं। ऐसे चायपत्ती में मिलावट की संभावना अधिक रहती है। आश्चर्य की बात यह है कि खाद्य विभाग की टीम मिठाई, नमकीन, मसाले, दूध, पनीर आदि खाद्य एवं पेय पदार्थों के नमूने तो एकत्र कर जांच के लिए भेजती है लेकिन चायपत्ती के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला नहीं भेजे जाते हैं, जिससे उसकी गुणवत्ता का सही पता नहीं चल पता है। खुले में बिक रही चायपत्ती को 9-10 तरीके की अलग-अलग रखी जाती है। दुकानदार असम और दार्जिलिंग की असली चायपत्ती बताकर ग्राहकों को विश्वास में लेकर उनहें मिलावटी चयपत्ती बेच देते हैं। घर जाने पर पता चलता है कि उसका स्वाद और रंग असली जैसे नहीं लगता है, जिसके बाद ग्राहक खुद को ठगा महसूस करते हैं।