पडरौना। जननी सुरक्षा योजना का जिले में बुरा हाल है। आशा कार्यकर्ता और सीएचसी अधीक्षकों की लापरवाही से अभी तक लक्ष्य के सापेक्ष बहुत ही कम प्रसव हुआ है, हालांकि डीएचएस की बैठक में सीएचसी अधीक्षकों को चेतावनी भी दी जा चुकी है, बावजूद अभी तक कोई प्रगति नहीं है।
आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका भी योजना को पलीता लगाने में कम नहीं है। पूर्व में निजी अस्पतालों में गर्भवतियों को पहुंचाने वाले आशा कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई भी हो चुकी है। इस सत्र में तय लक्ष्य को पूरा करने के लिए विभागीय जिम्मेदार भी काफी सक्रिय हैं।
वर्ष 2024-25 का जननी सुरक्षा योजना के तहत 60,577 प्रसव कराने का लक्ष्य स्वास्थ्य विभाग को मिला था। अभी तक 31,323 प्रसव ही हुआ है। इसमें सबसे खराब प्रगति सुकरौली, मोतीचक, कप्तानगंज और हाटा सीएचसी की है। लक्ष्य के सापेक्ष बहुत कम ही इन सीएचसी पर प्रसव हुआ है। खराब प्रगति को देख यहां के सीएचसी अधीक्षकों को लक्ष्य पूरा करने के लिए निर्देश दिया।