पडरौना। यदि आप बिरयानी के शौकीन हैं और सड़क पर कहीं भी इसे खाने के लिए तैयार हो जाते हैं, तो सावधान हो जाएं। शहर में बिक रही बिरयानी में हो रहा चमकीले रंगों का प्रयोग सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
शहर में 50 से अधिक बिरयानी की दुकानों पर जरूरत से अधिक रंगों का प्रयोग बिरयानी बनाने में किया जा रहा है। खाद्य विभाग की जांच में इसकी पुष्टि भी हो चुकी है। डॉक्टरों के मुताबिक चमकीले रंगों का प्रयोग सेहत के लिए नुकसानदायक होता है। ऐसे में खानपान में सतर्क रहने की जरूरत है। बिरयानी को रंगीन बनाने के लिए प्रयोग होने वाले नारंगी एवं पीला रंग खाने वाले रंग नहीं होते हैं। बल्कि मेटानिल येलो रासायनिक रंग हैं, जिससे कैंसर तक हो सकता है।
शहर में सुभाष चौक, रामकोला रोड, जिला मुख्यालय रोड, जटहां बाजार, बावली चौक, खड्डा और मेना बाजार समेत अन्य स्थानों पर बिरयानी की दुकानें सजतीं हैं। इसके अलावा कसया, हाटा, रामकोला, कप्तानगंज, खड्डा, फाजिलनगर, दुदही, तमकुहीराज, सेवरही, मथौली समेत सभी ग्रामीण क्षेत्र के सभी छोटे-बड़े चौराहों पर भी बिरयानी की दुकानें और ठेले लगे नजर आ जाते हैं।
मेडिकल कॉलेज रविंद्रनगर के प्राचार्य डॉ. आरके शाही ने बताया कि मेटानिल पीले रंग खाने में प्रयोग किए जाने वाले रंग नहीं होते हैं। यह अखाद्य रंग हैं। मेटानिल येलो रासायनिक रंग इस्तेमाल करने से स्वास्थ्य के लिए नुकसान हो सकता है। खाद्य रंग महंगे होने के कारण बिरयानी विक्रेता उनकी जगह इस सस्ते रासायनिक रंगों का इस्तेमाल करते हैं। डॉक्टर का कहना है कि मेटानिल रंग का प्रयोग खाद्य सामग्री में किए जाने से किडनी को भी नुकसान पहुंचता है।
लंबे अरसे तक रंगयुक्त खाद्य सामग्री प्रयोग करने से कैंसर का खतरा भी बना रहता है।
शहर के जगदीशपुरम कॉलोनी के निवासी सुनील कुमार मिश्र का कहना है कि शहर में कई बिरयानी की दुकानों पर साफ-सफाई भी नहीं रहती है। रंगयुक्त बिरयानी देखकर तो अच्छा लगता है, लेकिन यह पता नहीं है कि ये सेहत के लिए हानिकारक है। छुछिया गेट के सुनील कुमार मद्धेशिया ने बताया कि दुकानों पर स्वच्छता जरूरी है। साथ ही दुकानदारों को ग्राहक के स्वास्थ्य का भी ख्याल रखा जाना चाहिए। चमकीली बिरयानी स्वादिष्ट तो होती है, लेकिन इसका अवगुण जानकर उसका सेवन से डर लगता है।