पडरौना। चेहल्लुम पर बृहस्पतिवार को पडरौना शहर के विभिन्न मोहल्लों सहित आस-पास के गांवों से ताजिए निकाले गए। सभी ताजिए नगर के सुभाष चौक और तिलक चौक पर पहुंचे, जहां खिलाड़ियों ने हैरतअंगेज करतब दिखाए। देर रात ताजियों को कर्बला में दफन करने के बाद अकीदतमंद लौट गए।
पडरौना नगर के छावनी घोषी टोला, बाजार टोला, राइनी मोहल्ला, मुगलपुरा, सोहरौना, पकड़ी, खिरिया टोला, नोनियापट्टी, नौका टोला, बलुचहां सहित विभिन्न गांव-मोहल्लों के ताजिए रात में सुभाष चौक पर एकत्र किए गए। इनके साथ में ताजिए का जुलूस भी निकला। प्रत्येक ताजिए के साथ करतब दिखाने वाले खिलाड़ी भी थे। उन्होंने हैरतअंगेज करतब दिखाकर लोगों को दांतों तले उंगली दबाने पर विवश कर दिया। बच्चों के खिलौने, मिठाइयां सहित विभिन्न प्रकार की दुकानें भी सजी थीं। इसी तरह नगर के तिलक चौक पर जमालपुर, हथिसार मोहल्ला, बाड़ी टोला आदि स्थानों से ताजिए का जुलूस पहुंचा, जहां खिलाड़ियों ने करतब दिखाए। एक से बढ़कर एक आकर्षक ताजिए देखते ही बन रहे थे। देर रात तक चेहल्लुम का मेला सुभाष चौक और तिलक चौक पर लगा रहा। उसके बाद ताजियों को लेकर ताजिया कमेटियों के लोग अपने-अपने गांव-मोहल्लों में वापस चले गए। इस दौरान काफी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे।
उजारनाथ संवाद के अनुसार बृहस्पतिवार को सुबह से ही करमैनी बाजार में ताजियादार और मेले में आने वाले लोगों की भीड़ जुटने लगी। ताजिया जुलूस क्षेत्र में भ्रमण करते हुए निर्धारित मार्गों से निकला। मेले में मुस्लिम समाज के साथ-साथ विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोगों ने भी बड़ी संख्या में पहुंचकर गंगा-जमुनी तहजीब और आपसी सौहार्द की मिसाल पेश की। मेला में देर रात तक लोगों की भीड़ रही। बच्चों और महिलाओं ने झूलों और दुकानों से जमकर खरीदारी भी की। दोपहर बाद करबला एवं विभिन्न मोहल्लों में स्थापित चौकों पर फातिहा पढ़ी गई और दिवंगत परिजनों की मगफिरत तथा अमन-चैन के लिए दुआएं मांगी गईं।
इस दौरान यूनिस सिद्दीकी, मखबुल, जाकिर, वकील, एकलाख हुसैन, हैदर सैफी, शहीद रजा, लियाकत, वकील अहमद, हैदर अली रैनी, रवि आलम, अरविंद सिंह, जावेद अख्तर आदि मौजूद रहे।