पडरौना। पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के 24 दिन बाद भी घरेलू गैस की मारामारी कम नहीं हुई है। उपभोक्ताओं को सिलिंडर के लिए एजेंसियों पर घंटों लाइन लगानी पड़ रही है। इसके बावजूद उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। जबकि जिला प्रशासन की ओर से गैस भरपूर होने का दावा किया जा रहा है।
जिले में इंडेन, बीपीसीएल व एचपीसीएल की कुल 97 गैस एजेंसियां हैं। तीनों कंपनियों में नौ लाख से अधिक घरेलू गैस के उपभोक्ता पंंजीकृत हैं। इन परिवारों की रसोई गैस पर निर्भर है। 28 फरवरी को पश्चिम एशिया में शुरू हुए संघर्ष ने रसोई का भी बजट बिगाड़ दिया है। इसकी वजह रसोई गैस की किल्लत है।
सोमवार बंदी के बाद मंगलवार को गैस गोदामों पर उपभोक्ताओं की भीड़ लग गई। कुछ गोदामों पर गैस की गाड़ी नहीं पहुंचने से उपभोक्ताओं को निराश होकर लौटना पड़ा। पटहेरिया में भोर में 5 बजे से ही गैस के लिए कतार में खड़े उपभोक्ताओं ने दोपहर 12 बजे तक इंतजार किया। गाड़ी नहीं आई तो निराश होकर लौट गए। यहां तमकुहीराज गैस एजेंसी की गाड़ी पहुंचने की जानकारी मिलने पर उपभोक्ताओं की भीड़ जुली थी।
गैस सिलिंडर के लिए लाइन में लगे हरेंद्र तिवारी, सुदर्शन चौरसिया, संजय राव, अशोक गोड़, ब्रजेश राव, राजकुमार गुप्ता, कन्हैया गुप्ता, वीरेश राव, दुर्गेश गुप्ता, अरमान अंसारी आदि ने कहा कि गैस की गाड़ी चौराहे पर पहुंचने की सूचना मिली थी। इसलिए सुबह ही गोदाम पहुंच गए थे। गैस सिलिंडर नहीं मिलने पर उपभोक्ताओं ने प्रशासन को भी अवगत कराया।
0
लकड़ी के चूल्हे पर बना रहे एमडीएम
जौरा बाजार। फाजिलनगर ब्लाॅक की जौरा बाजार न्याय पंचायत के 10 परिषदीय विद्यालयों में रसोई गैस के अभाव में चूल्हे में लकड़ी जलाकर एमडीएम बनाया जा रहा है। न्याय पंचायत के प्राथमिक विद्यालय पचरुखिया, पूर्व माध्यमिक विद्यालय पचरुखिया, कंपोजिट विद्यालय नोनिया पट्टी, प्राथमिक विद्यालय विशुनपुरा ,कंपोजिट विद्यालय जौरा मुगल, प्राथमिक विद्यालय लक्ष्मीपुर, प्राथमिक विद्यालय नटवा, कंपोजिट विद्यालय जौरा बाजार में चूल्हे पर लकड़ी से भोजन तैयार कर बच्चों को परोसा जा रहा है।
0
बुकिंग के एक सप्ताह बाद मिला गैस सिलिंडर
तमकुहीरोड। पिछले मंगलवार को बुकिंग के बाद सेवरही की इंडेन गैस एजेंसी से एक सप्ताह बाद उपभोक्ताओं को गैस सिलिंडर दिया गया है। वहीं, कॉलेज रोड स्थित एचपी गैस एजेंसी पर उपभोक्ताओं की भीड़ कम होने का नाम नहीं ले रही है। उपभोक्ताओं का कहना है कि गैस बुकिंग के लिए 45 दिन की समय सीमा गांव के लोगों के लिए ठीक नहीं है। इस अवधि को पहले की तरह 21 दिन ही करना चाहिए, ताकि लोगों को हो रही दिक्कतों से निजात मिल सके। उपभोक्ता सुनील सिंह, रामप्रवेश पाल, सुरेंद्र प्रजापति, मोहन जायसवाल, रामभरोसा यादव, शिव शंकर राजभर, जितेंद्र कुशवाहा, हीरालाल प्रसाद, ज्ञानेश्वर सिंह व रविंद्र प्रसाद ने कहा कि गैस की किल्लत से परेशानी बढ़ गई है। उन्हें सुबह से ही गैस के लिए एजेंसियों पर लंबी लाइन लगानी पड़ रही है। इसके बावजूद गैस सिलिंडर मिलने की गारंटी नहीं है। गैस के लिए आपाधापी में दूसरे काम भी प्रभावित हो रहे हैं।