कुशीनगर में मांथा कुंवर मंदिर परिसर से पंपिंग मशीन व विद्युत मोटर से निकाला जा रहा डूबे धरोहरों
पडरौना। महात्मा बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली में ऐतिहासिक धरोहरों और पुरावशेषों को बचाने का काम शुरू करा दिया गया है। डीएम के निर्देश पर नगर पालिका और पुरातत्व विभाग की ओर से मोटर और पंपिंगसेट लगाकर जलनिकासी कराई जा रही है।
जिस ऐतिहासिक और पुरातात्विक विरासत को देखने दुनिया भर से बौद्ध श्रद्धालु आते हैं, वह बरसात के चार महीने पानी में डूब रहने से उसकी आभा फीकी पड़ रही है। मुख्य मंदिर, रामाभार स्तूप और माथा कुंवर मंदिर परिसर के लगभग 2,500 साल पुराने उत्खनित पुराअवशेष चार महीने तक पानी में जलमग्न रहते हैं।
इसको लेकर खबरें छपने के बाद प्रशासनिक महकमे और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) में हड़कंप मच गया। खबर का संज्ञान लेकर विभाग हरकत में आया और शुक्रवार से मुख्य मंदिर से लेकर माथा कुंवर मंदिर परिसर तक पंपिंग मशीन व मोटर लगाकर पानी निकालने का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया है।
पांचवीं शताब्दी की भगवान बुद्ध की शयन मुद्रा वाली ऐतिहासिक प्रतिमा के फाउंडेशन में जलभराव के कारण नमी और सीलन लगातार ऊपर चढ़ रही है। दक्षिण, पूरब, पश्चिम और उत्तर दिशा के फाउंडेशन की ईंटों के बीच खाली जगह, गड्ढे और दरारें साफ देखी जा सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नींव कमजोर हुई तो केवल केमिकल लेप लगाने से प्रतिमा को नहीं बचाया जा सकेगा।