फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kushinagar News: पांच मृतकों के नाम से हुआ था आवेदन...पहुंचा एक और परवाना

Mon, 17 Feb 2025 12:21 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
विज्ञापन
विज्ञापन
खड्डा। फर्जी परवाना आदेश पर राजस्व अभिलेखों में नाम दर्ज कराने के लिए एआरओ कोर्ट गोरखपुर में दो नहीं बल्कि पांच मृतकों के नाम से आवेदन किए गए थे। मालिक रजिस्टर में भू-माफिया दो नाम दर्ज कराने में सफल हो गए थे, बाकी तीन का भी जिम्मेदारों ने नाम दर्ज करने के लिए आदेश आंख बंद कर दिया था।
विज्ञापन

रविवार को एक और परवाना आदेश तहसील प्रशासन के हाथ लगा है। इसका भी तहसीलदार ने सत्यापन कराने का निर्देश दिया है। वहीं फर्जी परवाना आदेश पर मालिक रजिस्टर में नाम दर्ज करने वाले जिम्मेदारों पर कार्रवाई की तलवार लटकी है। फर्जी परवाना आदेश की संख्या अब 18 हो गई है। खड्डा तहसील के नदी उस पार गांवों की जमीन पर भू-माफियाओं ने गोरखपुर एआरओ कोर्ट से फर्जी परवाना आदेश की आड़ में कश्तकारों की जमीन पर नाम दर्ज कराने का जो जाल बुना था, उसमें वह खुद फंसते नजर आ रहे हैं।
शिवपुर गांव के काश्तकार पवन पांडेय ने तहसीलदार को एक और एआरओ कोर्ट गोरखपुर से आया परवाना आदेश देकर बताया है कि सुरेश आदि बनाम मिर्जा आदि के नाम से वाद संख्या 190 से मुकदमा चलने व तीन मई 2017 को आदेश होने का फर्जी परवाना खड्डा तहसील में भेजकर सुकदेव व श्यामकिशोर आदि निवासी शिवपुर थाना खड्डा अपना नाम दर्ज करा रहे हैं। अभी तक तहसील प्रशासन के हाथ सिर्फ 17 परवाना आदेश ही लगा था। एक और परवाना सामने आने के बाद अब संख्या 18 हो गई है। फर्जी परवाना व मुकदमा का आदेश लाने व तहसील में नाम दर्ज कराने के 18 मामले में काश्तकारों के अनुसार तहसील प्रशासन की शुरुआती जांच में पांच लोगों की बहुत पहले मौत हो चुकी है।
विज्ञापन

इनमें वाद संख्या 238 के वादी जालिम, वाद संख्या 93,1111 के वादी सर्वा, वाद संख्या 128 की वादी रूखमीना, वाद संख्या 89 की वादी कैलाशी और वाद संख्या 0191 के वादी गुरुचरन का नाम शामिल है। इनके नाम पर भी एआरओ कोर्ट गोरखपुर में राजस्व अभिलेख में दर्ज करने के लिए परवाना भी पहुंच गया है। इसके आधार पर इस खेल में शामिल भू-माफिया तहसील के रिकाॅर्ड में नाम दर्ज कराने के लिए अफसरों का चक्कर लगा रहे हैं।
छह फरवरी को इस मामले की जानकारी तहसील प्रशासन को हुई थी, इसके बाद फर्जी तरीके से भेजे गए परवाना को प्रमाणित करने में एक सप्ताह लग गए। एआरओ कोर्ट से सत्यापन रिपोर्ट मिले तीन दिन बीत गए, लेकिन अभी इस खेल में शामिल जालसाजों और तहसील के जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं हो सकी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें