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Kushinagar News: महिला की मौत मामले में लूना अस्पताल के संचालक पर दर्ज होगी प्राथमिकी

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महिला की मौत के मामले में कोर्ट ने दिया आदेश
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बिना सर्जन व एनेस्थीसिया डॉक्टर की मौजूदगी में ऑपरेशन का आरोप

पडरौना। लूना अस्पताल में पित्त की थैली में पथरी के ऑपरेशन के लिए भर्ती महिला की मौत के मामले में अब अस्पताल संचालक समेत अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होगी। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने कसया थानाध्यक्ष को प्रार्थना पत्र के आधार पर सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत कर विवेचना करने का आदेश दिए है।
अदालत में दाखिल प्रार्थना पत्र के अनुसार, मोहम्मद तसनीम कौसर ने अपनी पत्नी नर्गिस खातून को एक जून 2026 को पित्त की थैली में पथरी के ऑपरेशन के लिए लूना अस्पताल में भर्ती कराया था। अस्पताल कर्मियों ने दो जून की सुबह पांच बजे ऑपरेशन होने की बात कही थी। आरोप है कि सुबह करीब 8:30 बजे अस्पताल के ओटी टेक्नीशियन और कर्मचारी नर्गिस को ऑपरेशन थिएटर ले गए और खुद ही दवा-इलाज करने लगे। करीब नौ बजे परिजन को बताया गया कि मरीज की हालत नाजुक है और उसे दूसरे अस्पताल ले जाना पड़ेगा।
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परिजन के अनुसार, अस्पताल कर्मियों ने नर्गिस को एंबुलेंस से कसया के गोपालगढ़ स्थित एक अस्पताल में पहुंचाया। वहां डॉक्टरों ने उसे वेंटिलेटर पर रखा और बाद में बताया कि उसकी मौत पहले ही हो चुकी है। इसके बाद परिजन उसे मेडिकल कॉलेज गोरखपुर ले गए, वहां भी डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
पोस्टमार्टम में चार जगह मिले चीरे का निशान
प्रार्थी के मुताबिक, शव का तीन जून को पोस्टमार्टम कराया गया। पोस्टमार्टम के दौरान पेट और शरीर पर चार जगह चीरे के निशान तथा वहां टांके और सर्जिकल टेप लगे होने की जानकारी मिली। आरोप है कि अस्पताल में सक्षम एनेस्थीसिया डॉक्टर और सर्जन की मौजूदगी के बिना ही नर्गिस का ऑपरेशन किया गया, जिससे उसकी मौत हुई। आयुष्मान प्रक्रिया में भी गड़बड़ी का आरोप प्रार्थी ने अस्पताल संचालक डॉ. रिजवान आलम और कर्मचारियों पर आरोप लगाया है। आरोप है कि मृतका के आधार और मोबाइल का इस्तेमाल कर उसकी पहचान एवं पारिवारिक विवरण को पश्चिमी चंपारण, बिहार के एक परिवार की आईडी से जोड़कर आयुष्मान योजना की प्रक्रिया की गई। प्रार्थी ने अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज, आसपास के घरों की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग तथा संबंधित डॉक्टरों के मोबाइल नंबरों की सीडीआर और लोकेशन की जांच कराने की मांग की है।
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पुलिस रिपोर्ट में मुकदमा दर्ज नहीं होना बताया गया
अदालत ने प्रार्थी के आवेदन पर कसया थाने से आख्या तलब की थी। थाना स्तर से दी गई आख्या में घटना के संबंध में कोई अभियोग पंजीकृत नहीं होने की बात कही गई। प्रार्थी की ओर से पोस्टमार्टम रिपोर्ट, चिकित्सा अधिकारियों के पत्र, आयुष्मान से संबंधित मैसेज और पुलिस अधीक्षक को भेजे गए शिकायती पत्र की रसीद समेत अन्य दस्तावेज अदालत में प्रस्तुत किए गए। अदालत ने इन तथ्यों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध बनना माना। इसके बाद कसया थानाध्यक्ष को प्राथमिकी दर्ज कर मामले की विवेचना करने और विवेचना पूरी होने के बाद न्यायालय को कार्रवाई से अवगत कराने का निर्देश दिए है। यह आदेश एक अक्तूबर 2026 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने जारी किया।
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