कुशीनगर। अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट को प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत पूरे देश में सबसे अधिक छूट देना, लाइसेंस में अपग्रेड होना और लगातार जिला प्रशासन व अथॉरिटी का प्रयास उड़ान शुरू होने की संभावनाओं प्रदर्शित कर रहा है। अब पूरी तरह निगाहें एयरलाइंस कंपनियों पर टिकी हैं कि वह किस तरह यहां से उड़ान को लेकर रुचि लेती हैं। कुशीनगर एयरपोर्ट से भले ही डोमेस्टिक फ्लाइट (घरेलू उड़ान) नियमित रूप से संचालित और सफल नहीं हो सकी लेकिन अगर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की शुरुआत होती है तो बेहतर कदम होगा। पूर्वांचल और बिहार के लोगों की खाड़ी देशों में रोजगार की निर्भरता के कारण न केवल यात्री अधिक संख्या में मिलेंगे बल्कि दूर से आने वाली उड़ान खराब मौसम के बावजूद गंतव्य तक पहुंचकर लैंड और टेकऑफ कर जाएंगी।
अंतरराष्ट्रीय उड़ान इसलिए भी सफल मानी जा रही है कि एक तो पूर्वांचल और बिहार के लोग खाड़ी देशों में बसे हुए हैं, दूसरी ओर कुशीनगर के अलावा पूर्वांचल में महज वाराणसी ही ऐसा एयरपोर्ट है जो अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की सेवा देता है। देश में जिन 13 अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट को प्रोत्साहन योजना की मंजूरी मिली थी उसमें सबसे अधिक छूट कुशीनगर को मिली थी। ऐसे में तीन वर्षों तक अंतरराष्ट्रीय उड़ान में भी अथॉरिटी और एयरलाइंस कंपनियों को फायदा होगा। दरअसल, गोरखपुर में घरेलू उड़ानों की बढ़ती संख्या से भी कुशीनगर में घरेलू उड़ान सफल नहीं हो सका था।