अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट कुशीनगर से हवाई सेवाओं के संचालन को लेकर जिले के सांसदों ने सदन में आवाज उठाई तो एयरपोर्ट पर यात्रियों की बड़े-बड़े विमानों को लेकर ऑल इस वेल का दावा किया गया। बताया गया कि एयरपोर्ट अब यात्री विमानों के उड़ने और रात में विमानों के लैंडिंग टेकऑफ के मानदंडों की पूर्ति करता है, लेकिन जब कुछ ही दिनों बाद सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के विमान के कुशीनगर एयरपोर्ट पर उतरने का समय निर्धारित हुआ और जब लैंडिंग का समय आया तो अंतिम क्षण में एयरपोर्ट ऑथोरिटी ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) से सिंगनल नहीं मिला।
मौसम खराब है और तकनीकी बाधाएं हैं, ऐसे में क्या इसी आधार पर उड़ान को लेकर दावा किया जा रहा है और अगर ऐसा है तो अभी तो कुशीनगर में एक भी यात्री विमानों का लैंडिंग टेकऑफ नहीं हो रहा है तो ये हाल है। वहीं, कुछ लोग इसे राजनीतिक दवाब के चलते लैंडिंग न होने देने का करार दे रहे हैं। चर्चा है कि माह पूर्व एयरपोर्ट संचालन को लेकर तेज हुई अभियान में लैंडिंग के बाद कार्यकर्ताओं के साथ सपा सुप्रीमो एयरपोर्ट के संचालन को लेकर हुंकार भर सकते थे, ऐसे में उन्हें अनुमति नहीं दी गई और बहाना देकर टाल दिया गया।
बृहस्पतिवार को ही समाजवादी पार्टी ने एयरपोर्ट ऑथोरिटी को पत्र भेजकर चार्टर उतरने को लेकर अवगत करा दिया था। अनुमति नहीं मिलने पर अमौसी एयरपोर्ट लखनऊ से उड़ी अखिलेश यादव की प्लेन को दिशा बदलकर गोरखपुर में लैंड करानी पड़ी। 11 बजे वहां उतरने के बाद कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया और वहां से वह सड़क मार्ग से कुशीनगर आए। सपा सुप्रीमो से जब इस विषय में पूछा गया तो कहा कि आप पत्रकार है आप इसे साझा करें। हमें मौसम खराब को लेकर अवगत कराया गया जबकि आसमान में क्लियर स्काई थी। सबसे ज्यादा अगर इस एयरपोर्ट पर किसी सरकार के धन खर्च किया है तो वह सपा सरकार है और यह एयरपोर्ट सपा सरकार की देन है।
अंतिम क्षण में बदला रूट
एयरपोर्ट की लापरवाही कहे या जानबूझकर किया गया प्रयास। कुशीनगर एयरपोर्ट पर अखिलेश का विमान न उतरने पर उसे गोरखपुर डायवर्ट कर दिया गया। इसके बाद कुशीनगर के एयरपोर्ट पर अपने नेता की इंतजार में खड़े कार्यकर्ताओं में रोष देखने को मिला। इसके बाद 11 बजे गोरखपुर सिविल एयरपोर्ट पर उतरने के बाद भी सपा सुप्रीमो के कार्यक्रम और रूट को लेकर उहापोह की स्थिति रही। पहले से जारी मिनट टू मिनट कार्यक्रम के विपरीत वह गोरखपुर से हाटा मार्ग से आएंगे यहां अन्य वैकल्पिक रास्ते से यह तय नहीं था। वह मदनी मस्जिद के पक्षकार से भी मिले जो पूर्व निर्धारित कार्यक्रम का हिस्सा नहीं था।