कुशीनगर। फर्जी स्टांप मामले में मंगलवार को गोरखपुर में बिचौलिया रिंकू देवी की गिरफ्तारी के बाद कुशीनगर के चार आरोपियों की भी तलाश तेज हो गई। रिंकू ने शामिल आरोपियों के विषय में पुलिस से सूचना साझा की है। इसके आधार पर पुलिस दबिश देनी शुरू कर दी है। दूसरी ओर चारो आरोपी घर छोड़कर लापता हैं।
फर्जी स्टांप का मामला वर्ष 2024 के सितंबर माह में सामने आया था। इसमें कैंट पुलिस ने केस दर्ज किया था। इसकी जांच करते हुए पुलिस बिहार तक पहुंची। वहां सिवान जिले के मोफलिस थाना क्षेत्र के नई बस्ती निवासी नवाब आरजू उर्फ लालू, साहेबजादे को गिरफ्तार किया। तब कुशीनगर के चार आरोपियों के नाम का पर्दाफाश हुआ। इसमें कसया थाना क्षेत्र के जानकीनगर निवासी ऐश मोहम्मद, पडरौना के सिरसिया निवासी रविंद्र दीक्षित, पडरौना के ही बकुलहवा निवासी नंदू उर्फ नंदलाल और चिरगोडा नन्दबलिया थाना कसया निवासी गोपाल तिवारी का नाम सामने आया। इन सभी पर पुलिस ने पिछले माह गैंगस्टर की कार्रवाई की है। अब अवैध कार्य से अर्जित संपत्ति जब्त करने के साथ कार्रवाई के लिए दबिश दे रही है। कुशीनगर के चारों आरोपी सिवान के नवाब आरजू के फर्जी स्टांप मामले में सहयोगी थे, जिसमें गोपाल तिवारी स्टांप विक्रेता था वहीं ऐश, रविन्द्र और नंदू स्टांप वेंडर बनकर इस गैंग को क्लाइंट मुहैया कराते थे। सूत्रों के अनुसार नब्बे के दशक से इस फर्जीवाड़े को पूर्वांचल और पश्चिमी यूपी के जिलों में फैलाने में कुशीनगर के इन चारों आरोपियों ने बड़ी मेहनत की। करोड़ों के राजस्व की क्षति भी पहुंचाई।
12 आरोपियों पर हुई है गैंगस्टर की कार्रवाई
फर्जी स्टांप मामले में गोरखपुर पुलिस ने 12 आरोपियों पर गैंगस्टर की कार्रवाई की है। इसमें चार को पुलिस गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। बाकी आरोपियों की तलाश में दबिश दे रही है। कुशीनगर के रहने वाले आरोपी घर छोड़कर फरार हैं। कसया निवासी ऐश मोहम्मद सिवान के नवाब आरजू का रिश्तेदार है। इसके बारे में परिजनों को कोई जानकारी नहीं है, वह कहां है और क्या कर रहा है। सिरसिया निवासी रविंद्र दीक्षित, पडरौना के बकुलहवा निवासी नंदू उर्फ नंदलाल और चिरगोडा नन्दबलिया थाना कसया निवासी गोपाल तिवारी घर छोड़कर गायब हैं।
नवाब आरजू है गैंग का सरगना
फर्जी स्टांप गैंग का सरगना बिहार के सिवान निवासी नवाब आरजू ने पूर्वी और पश्चिमी यूपी के जिलों में धंधे को फैलाया। कुशीनगर के भी कुछ नामी स्टांप वेंडरों को इसमें शामिल किया। यह बिहार, दिल्ली, राजस्थान समेत प्रदेश के कई जिलों में अच्छी पैठ रखते थे। सूत्रों की मानें तो यही लोग ऑर्डर मिलते ही नवाब से जानकारी साझा करते थे। फिर ऑर्डर के मुताबिक इसे विभिन्न राज्यों में बेचते थे।