हरिहरपुर। नगर पंचायत हरिहरपुर के राजघाट पुल के समीप कष्टहरिणी (कठिनइया) नदी के किनारे हो रहे निर्माण कार्य की जांच के लिए गुरुवार को एडीएम पहुंचे। इस दौरान उन्होंने नदी की धारा मोड़ने के लिए चल रहे काम पर नाराजगी जताई तथा निर्माण कार्य कराने में जुटे ईओ और अभियंताओं को फटकार लगाते हुए सारे कागजात के साथ तलब किया है।
जानकारी के मुताबिक हरिहरपुर में कष्टहरिणी नदी पर राजघाट पुल के समीप हो रहे निर्माण कार्य को जंगल की भूमि पर कब्जा बताते हुए नगर निवासी राम बचन ने इसकी शिकायत डीएम से की थी। जांच में देर होने पर नाराज लोगों ने मंगलवार को निर्माण स्थल के पास प्रदर्शन भी किया था। विरोध प्रदर्शन कर रहे हरिओम वर्मा, गंगा पटवा, दीपू, रामबचन, ओंकारनाथ, कैलाश, शिवशंभू, रामचरित, संजय,रामवचन, भोला,दयाराम, उमेश, जमुना आदि लोगों का कहना है कि जिस भूमि पर निर्माण कार्य चल रहा है वह जंगल की भूमि है। लोगों ने बताया कि नदी की धारा मोड़ देने से किनारे पर बसे गांवों के अस्तित्व पर संकट हो सकता है।
मामले का संज्ञान लेते हुए बृहस्पतिवार को निर्माण स्थल की जांच करने पहुंचे एडीएम ने शिकायतकर्ता रामबचन से जानकारी ली। मौके पर मौजूद नगर पंचायत के ईओ अवनीश यादव से निर्माण स्थल की जमीन के बारे में पूछा। संतोषजनक जवाब न मिलने से एडीएम में नाराजगी जताई और निर्माण स्थल संबंधी भूमि के अभिलेख के साथ ईओ और शिकायतकर्ता को एडीएम कार्यालय बुलाया।
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रंगपाल की समाधि व श्मशान भी खतरे में
नगर पंचायत हरिहरपुर स्थित राजघाट पुल के समीप कठिनइया नदी के किनारे हो रहे निर्माण से श्मशान घाट और महाकवि रंगपाल की समाधि के अस्तित्व पर भी संकट मंडरा रहा है। नगर निवासी राम बचन, प्रकाश, गंगा पटवा का कहना है कि नदी के किनारे हो रहे निर्माण कार्य से महाकवि रंगपाल की समाधि का अस्तित्व भी खतरे में है। लोगों का कहना है कि कार्यदायी संस्था जहां निर्माण कार्य करा रही है वहां श्मशान घाट भी है।
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ये है मामला
नगर पंचायत हरिहरपुर की ओर से राजघाट के पास स्थित जमीन पर पिकनिक स्पाट बनवाया जा रहा है। इसके लिए नदी को बीच में बांधा जा रहा है। लोगों का कहना है कि यह जंगल की जमीन है। इसमें लोग खातेदार भी हैं। पर्यटन विभाग को अंधेरे में रखकर यह योजना स्वीकृत करा ली गई है। इससे नदी की धारा मुड़ जाएगी और नदी केवटहिया, जोगाराजा, कोहरगड्डी के सिवान को डूबा सकती है।
कोट
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिम्मेदार अधिकारियों को जिला मुख्यालय पर बुलाया गया है। पर्यटन विभाग के प्रस्ताव तथा सभी अभिलेखों की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही किसी भी निर्णय पर पहुंचा जा सकता है।
-जय प्रकाश, एडीएम, संतकबीरनगर