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Kushinagar News: राष्ट्रीय चुनौतियों के मद्देनजर युवा पीढ़ी का निर्माण करें आचार्य

Tue, 16 Jun 2026 02:20 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
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कसया। महर्षि अरविंद विद्या मंदिर में नवचयनित आचार्य प्रशिक्षण वर्ग के चौदहवें दिन सोमवार को मुख्य अतिथि विद्या भारती के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री यतींद्र ने आचार्यों को राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका का बोध कराया। कहा कि आचार्य राष्ट्रीय चुनौतियों के मद्देनजर युवा पीढ़ी का निर्माण करें।
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उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक एवं वैचारिक दृष्टि से भी पूर्ण होनी चाहिए। स्वतंत्रता के बाद शिक्षा व्यवस्था में भारतीयता और स्व के भाव को अपेक्षित स्थान नहीं मिल सका। उन्होंने कहा कि आचार्य का कार्य केवल विषय ज्ञान देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करना है, जिससे वे राष्ट्रीय एवं वैश्विक चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बन सकें।

उन्होंने कहा कि देश की शिक्षा संबंधी समस्याओं का समाधान भारतीय जीवन दर्शन, संस्कृति और समाज की आवश्यकताओं के अनुरूप ही संभव है। इतिहास शिक्षण में भारतीय दृष्टिकोण और महापुरुषों के योगदान को समुचित स्थान देने के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा, वेदों और प्राचीन शिक्षा पद्धति के गौरवशाली स्वरूप से नई पीढ़ी को परिचित कराना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आचार्य समाज निर्माण के प्रमुख आधार हैं। उनके मार्गदर्शन में ही ऐसी युवा पीढ़ी तैयार होगी जो देश की वर्तमान चुनौतियों को समझते हुए राष्ट्र के विकास में सक्रिय भूमिका निभाएगी।कार्यशाला का संचालन दिवाकर राम त्रिपाठी ने किया।
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इस दौरान प्रधानाचार्य धर्मेन्द्र मिश्रा, रणजीत उपाध्याय मनोज श्रीवास्तव, महेंद्र पांडेय, दिवाकर राव, रोशनी शर्मा, धर्मेंद्र साहू, रामजीत सिंह, चंदेश्वर चौबे, तपनारायण कुशवाहा सहित सभी नवचयनित प्रशिक्षु आचार्य मौजूद रहे।

महर्षि अरविंद विद्या मंदिर में नवचयनित आचार्य प्रशिक्षण वर्ग का आयोजन

फोटो है।

संवाद न्यूज एजेंसी

कसया। महर्षि अरविंद विद्या मंदिर में नवचयनित आचार्य प्रशिक्षण वर्ग के चौदहवें दिन सोमवार को मुख्य अतिथि विद्या भारती के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री यतींद्र ने आचार्यों को राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका का बोध कराया। कहा कि आचार्य राष्ट्रीय चुनौतियों के मद्देनजर युवा पीढ़ी का निर्माण करें।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक एवं वैचारिक दृष्टि से भी पूर्ण होनी चाहिए। स्वतंत्रता के बाद शिक्षा व्यवस्था में भारतीयता और स्व के भाव को अपेक्षित स्थान नहीं मिल सका। उन्होंने कहा कि आचार्य का कार्य केवल विषय ज्ञान देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करना है, जिससे वे राष्ट्रीय एवं वैश्विक चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बन सकें।

उन्होंने कहा कि देश की शिक्षा संबंधी समस्याओं का समाधान भारतीय जीवन दर्शन, संस्कृति और समाज की आवश्यकताओं के अनुरूप ही संभव है। इतिहास शिक्षण में भारतीय दृष्टिकोण और महापुरुषों के योगदान को समुचित स्थान देने के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा, वेदों और प्राचीन शिक्षा पद्धति के गौरवशाली स्वरूप से नई पीढ़ी को परिचित कराना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आचार्य समाज निर्माण के प्रमुख आधार हैं। उनके मार्गदर्शन में ही ऐसी युवा पीढ़ी तैयार होगी जो देश की वर्तमान चुनौतियों को समझते हुए राष्ट्र के विकास में सक्रिय भूमिका निभाएगी।कार्यशाला का संचालन दिवाकर राम त्रिपाठी ने किया।

इस दौरान प्रधानाचार्य धर्मेन्द्र मिश्रा, रणजीत उपाध्याय मनोज श्रीवास्तव, महेंद्र पांडेय, दिवाकर राव, रोशनी शर्मा, धर्मेंद्र साहू, रामजीत सिंह, चंदेश्वर चौबे, तपनारायण कुशवाहा सहित सभी नवचयनित प्रशिक्षु आचार्य मौजूद रहे।
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