निर्धारित समय से पहले ही बंद मिले आंगनबाड़ी केंद्र
पडरौना (कुशीनगर)। बाल विकास परियोजना की योजनाएं नगर क्षेत्र में धरासायी साबित हो रही हैं। बृहस्पतिवार और सोमवार को सुबह दस बजे से दोपहर एक बजे तक केंद्र संचालन और एक बजे से दोपहर दो बजे तक लोगों से संपर्क करने का निर्देश है, लेकिन बृहस्पतिवार को नगर के तीन आंगनबाड़ी केंद्र निर्धारित समय से पहले ही बंद मिले।
नगर क्षेत्र के 25 वार्डों में 86 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इसमें नगर के करीब तीन हजार बच्चे नामांकित हैं। इन बच्चों को पढ़ाई कराने और गर्भवती तथा गर्भधात्री महिलाओं को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए 80 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तैनात हैं, जबकि छह आंगनबाड़ी केंद्रों का पद रिक्त है। इन रिक्त आंगनबाड़ी केंद्रों पर आसपास के केंद्रों के आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सरकारी योजनाओं से लाभार्थियों को लाभान्वित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सरकार इन आंगनबाड़ी केंद्रों को कान्वेंट स्कूल के प्लेवे स्कूल की तरह विकसित करना चाहती है। लेकिन विभागीय उदासीनता और आंगनबाड़ी केंद्रों पर तैनात आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की लापरवाही से सरकार की मंशा पर पानी फिर रहा है।
बृहस्पतिवार नगर के आंबेडकर नगर वार्ड में किराए पर संचालित चार आंगनबाड़ी केंद्रों की पड़ताल की गई, जिसमें सभी केंद्र पर बंद मिले। यहां एक भी बच्चे मौजूद नहीं थे। इस मोहल्ले के केंद्र संख्या एक पर तैनात आंगनबाड़ी कार्यकर्ता दयानप्यारी देवी दवा कराने गईं थी। केंद्र संख्या दो पर तैनात सोना देवी केंद्र पर जरूरी उपस्थित रहीं, लेकिन वहां दोपहर करीब 12 बजे कोई बच्चे मौजूद नहीं था। उन्होंने बताया कि केंद्र पर कुल 53 बच्चे नामांकित हैं। इसमें से बृहस्पतिवार को केवल 10 बच्चे ही उपस्थित हुए थे। इस मुहल्ले में संचालित केंद्र संख्या तीन भी दोपहर करीब पैने एक बजे बंद मिला। यहां तैनात आंगनबाड़ी कार्यकर्ता इंदू देवी ने बताया कि केंद्र पर कुल 22 बच्चे नामांकित हैं। इसमें 13 बच्चे बृहस्पतिवार को उपस्थित हुए थ।
अंबेडकर नगर निवासी सुनील केसरी ने बताया कि इस आंगनबाड़ी केंद्र पर उनकी बेटी सुमन का नामांकन हैं। हर महीने चावल, तेल, दाल समेत अन्य बस्तुएं मिलती है, लेकिन केंद्र पर नियमित पढ़ाई नहीं होती है।
संजीत केसरी ने बताया कि घर बगल में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र पर उनकी बेटी अनन्या का नामांकन है। इस केंद्र की तरफ मिलने वाली सभी बस्तुए उन्हें समय से उपलब्ध होता है।
धर्मेंद्र केसरी ने बताया कि बीते तीन माह से उनकी बेटी को आंगनबाड़ी केंद्र से मिलने वाली किसी भी सुविधा का लाभ नहीं मिल सका है।
विजय प्रताप ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्र की तरफ से बीते दो वर्ष पहले सहजन का पौधा लगाने के लिए मिला था। उसे दरवाजे पर लगाया, लेकिन कुछ समय बाद वह सूख गया।
निर्धारित समय से पहले ही केंद्र का संचालन बंद होना और लाभार्थियों तक सरकारी योजनाओं का लाभ समय से नहीं मिलना गंभीर बात है। इसकी जांच कराकर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
मंजू देवी.. प्रभारी सीडीपीओ