संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। मौनी अमावस्या पर पनियहवा स्थित नारायणी नदी घाट समेत समेत अन्य सभी प्रमुख नदी घाटों पर आस्था का सैलाब उमड़ा। श्रद्धालुओं में नदियों में आस्था की डुबकी लगाई और दानपुण्य कर परिवार के सुख समृद्धि की कामना की, लेकिन नदी घाटों पर उमड़े श्रद्धालुओं के आगे प्रशासन के इंतजाम कम पड़े। इससे श्रद्धालुओं को परेशानी उठानी पड़ी।
पंडित हरिओम मिश्र ने बताया कि माघ महीने की अमावस्या को मौनी अमावस्या भी कहते हैं। इस दिन मौन रखकर नदियों में डुबकी लगाने की मान्यता है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन पवित्र संगम में देवताओं का निवास होता है, इसलिए इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है। इस मास को भी कार्तिक के समान पुण्य मास कहा गया है। मौनी अमावस्या पर जिले के श्रद्धालुओं ने बड़ी गंडक के पनियहवा, भैसहां घाट, पिपराघाट समेत अन्य स्थलों पर डुबकी लगाई।
इसी तरह छोटी गंडक और बांसी नदी में भी श्रद्धालु स्नान करने के बाद दान-दक्षिणा दिया तथा पूजा-अर्चना करते नजर आए। यही, नहीं जिले से काफी संख्या में श्रद्धालु नेपाल के त्रिवेणी में भी स्नान के लिए गए। श्रद्धालुओं ने छोटी गंडक के हेतिमपुर, रगड़गंज समेत अन्य घाटों व बांसी नदी में भी डुबकी लगाई।
खड्डा संवाद के अनुसार, पनियहवा पुल/ घाट के पास नारायणी नदी तट पर मौनी अमावस्या पर काफी संख्या में श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई, जबकि स्थानीय प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधाओं का इंतजाम ठीक नहीं रहा। श्रद्धालुओं की भीड़ के मुताबिक स्नान घाट, शौचालय, चेंजिंग रूम व पेयजल की व्यवस्था नहीं दिखाई दी।
यहां शनिवार रात से श्रद्धालु मेला क्षेत्र में पहुंचने लगे थे। रविवार को भोर में कड़कड़ाती ठंड में भी डुबकी लगाई। व्यवस्था के अभाव में लोग असुरक्षित तरीके से नदी के दूर तक हिस्से में फैलकर स्नान करते नजर आए। स्नानार्थियों के लिए बनाए गए पक्का शौचालय जर्जर उनके फाटक टूटे हुए थे। सफाई के अभाव में गंदगी फैली हुई थी।
रविवार भोर में करीब 30 मिनट के लिए बिजली की आपूर्ति भी बाधित होने से अंधेरा छाया रहा। इसके अलावा नेपाल के त्रिवेणी संगम पर स्नान करने गए लोगों के वाहन वापस लौटते समय जाम में घंटों फंसे रहे।
छितौनी संवाद के अनुसार, पनियहवा नारायणी घाट पर जिले के अलावा महराजगंज, देवरिया, गोरखपुर सीमावर्ती राज्य बिहार के श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई। शनिवार की रात में ही लोगों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। श्रद्धालुओं को कोई परेशानी न हो इसके लिए स्थानीय प्रशासन अलर्ट रहा।
तमकुहीरोड संवाद अनुसार सेवरही क्षेत्र में रविवार को मौनी अमावस्या पर स्नान व दान को लेकर शनिवार से ही बांसी व गंडक नदी के तट पर स्नान करने वालों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। श्रद्धालुओं ने रात्रि में कल्पवास कर आधी रात के बाद से ही पवित्र स्नान शुरू कर दिया था। सेवरही क्षेत्र सहित दूर दराज से आए हजारों श्रद्धालुओं ने बांसी नदी के शिवाघाट, गौरी घाट, दमकला घाट, गोलाघाट तो गंडक नदी के तट पर जंगली पट्टी, जवही दयाल, विरवट कोन्हवलिया, बाक खास, बाघाचौर, नोनियापट्टी, अहिरौलीदान सहित अन्य घाटों पर हजारों की संख्या में आस्था की डुबकी लगाई। इसके बाद नदी में दीपदान कर मंदिरों में पूजा अर्चना की और दान किया।
रामकोला संवाद के अनुसार, मौनी अमावस्या पर स्नान के लिए रविवार की सुबह से ही छोटी गंडक बालाछतर घाट पर स्थानीय गांव के श्रद्धालुओं के अलावा पड़ोसी जिला महाराजगंज के सीमावर्ती गांव के श्रद्धालुओं ने स्नान किया।
मथौली संवाद के अनुसार, कस्बा से होकर गुजरी छोटी गंडक नदी घाट पर मौनी अमावस्या के अवसर पर रविवार की सुबह क्षेत्र के रगड़गंज, फर्दहा, मुडिला हरपुर, अथरहा आदि गांव के श्रद्धालुओं ने स्नान कर दान किया।