पडरौना। प्रदेश व्यापी धरने में सफलता न मिलने से नाराज लेखपालों ने भू-लेख से जुड़े कार्यों को छोड़कर अन्य सभी दायित्वों को वापस करने और अन्य कोई कार्य नहीं करने का निर्णय लिया है। माना जा रहा है कि इससे आमजन से लगायत प्रशासन को भी कार्य कराने में दुश्वारियां उठानी पड़ेगी। प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर लेखपालों ने 13 अक्टूबर को लखनऊ में धरना दिया था लेकिन उनकी मांगी पूरी नहीं हुईं।
इससे नाराज लेखपालों ने भू-लेख से जुडे़ दायित्वों के अलावा अन्य किसी दायित्व अथवा प्रभार का कार्य करने से इंकार कर दिया है। जिले की 956 ग्रामसभाओं में पूर्व से ही लेखपालों की कमी है। जिला प्रशासन की मानें तो कुल पदों के सापेक्ष आधे से अधिक गांवों में लेखपाल तैनात ही नहीं हैं।
एक-एक लेखपाल के जिम्मे कई गांवों में पैमाइश, जाति, आय व निवास प्रमाण पत्र के लिए सर्वे, दैवीय आपदा, चुनाव और इस तरह के अन्य कई कार्यों का जिम्मा होता है। राजस्व निरीक्षक का अतिरिक्त चार्ज भी इन्हें दे दिया गया है। ऐसे में एक तो लेखपाल लोगाें को समय पर मिल नहीं पाते, दूसरे इनके जिम्मे भी अधिक कार्य होने के कारण यह समय नहीं दे पाते। जिला प्रशासन के पास राजस्व संबंधी कर्मचारियों की कमी के कारण लेखपालों से कार्य कराना विवशता है। ऐसे में लेखपालों के अतिरिक्त चार्ज छोड़ने की घोषणा के बाद आमजन को तहसील संबंधी अपने कार्यों के लिए भटकना पड़ेगा वहीं जिला प्रशासन के लिए भी निर्धारित समय के अंदर कार्य पूर्ण कराना चुनौती होगी।