पडरौना। चीनी मिलों के पेराई सत्र शुरू करने के लिए सीएम की घोषणा ने गन्ना किसानों को राहत पहुंचाई है। असमंजसों के बीच हुई घोषणा से जिले की चीनी मिलों के प्रबंधतंत्र की परेशानियां बढ़ गई हैं। हालांकि सरकार और कई चीनी मिलों से जुड़े लोग तथा इनके संगठन इस्मा के बीच बुधवार को भी बैठक चल रही है। इस बैठक से चीनी मिलों के लोगों को लग रहा है कि गन्ना मूल्य के साथ अन्य समस्याओं का भी हल निकल जाएगा।
सूबे में गन्ना मूल्य की घोषणा न होने तथा चीनी मिलों के पेराई सत्र शुरू करने की तिथि न तय किए जाने से गन्ना किसान काफी चिंतित हो गए थे। जिले के किसानों की सबसे बड़ी समस्या यह थी कि गेहूं के बावग का समय आ गया है और मिलों के चलने की तिथि अब तक तय नहीं हुई। जिले के किसान गन्ना बेचकर उससे खाली हुई जमीन पर गेहूं का बावग करते हैं। पेराई सत्र की घोषणा न होने से किसानों के समझ में यह नहीं आ रहा था कि वे अपना खेत खाली करने के लिए क्या करें? उनके सामने एक ही उपाय था कि वे अपना गन्ना क्रशरों पर औने-पौने दामों पर बेचें। ऐसे में सीएम की घोषणा कि पूर्वांचल की चीनी मिलें 25 से 30 नवंबर के बीच चलेंगी, ने किसानों को काफी राहत पहुंचाई है। लेकिन इस घोषणा ने चीनी मिलों के प्रबंध तंत्र के पेशानी पर बल जरूर डाल दिया है। कारण है कि गन्ने में चीनी का परता अब भी कम ही मिल रहा है। जिले की लगभग सभी चीनी मिलें मरम्मतीकरण करा चुकी हैं। केवल एक बार स्टीम ट्रॉयल बाकी है। वैसे तो गन्ने में चीनी का परता लगातार बढ़ रहा है। पिछले सप्ताह जोे परता चार फीसदी के आसपास था, वह इस सप्ताह छह के आसपास हो गया है। सूत्रों के अनुसार नवंबर माह के अंत तक या दिसंबर माह के प्रारंभ में यह परता चीनी मिलों के पेराई सत्र प्रारंभ करने के लिए जरूरी आठ फीसदी के आस पास पहुंच जाएगा। वैसे भी जिले की मिलें पिछले पेराई सत्रों में नवंबर के अंत या दिसंबर के शुरूआत में ही चली हैं। जिले की सभी चीनी मिलें 25 नवंबर से लेकर 05 दिसंबर के बीच ही चलती हैं।
सूत्रों के अनुसार सरकार गन्ने का दाम बढ़ाने के साथ-साथ चीनी मिलों को भी कुछ राहत देने की तैयारी कर रही है। यदि ऐसा हुआ तो चीनी मिलें भी आर्थिक तंगी के कगार पर नहीं आएगीं तथा गन्ना किसान भी गन्ने की खेती से विमुख नहीं होगा।
तो क्या बिना मूल्य तय किए चलेंगी मिलें
तमकुहीरोड। सूबे की चीनी मिलों के चलाए जाने के निर्देश से लोगों के जेहन में सवाल उठ रहा है कि क्या चीनी मिलें अब बिना गन्ना मूल्य निर्धारण के ही चलेंगी ? जिस बात को लेकर चीनी मिलें और सरकार आमने सामने रहीं है, क्या बिना उसके समाधान के चीनी मिलें चलेंगी ? विपक्ष के लोग इसे किसानों के साथ धोखा बताते हुए कहते हैं कि एक बार फिर किसानों को छलने की तैयारी की जा रही है। कांग्रेसी नेता मोहम्मद अली का कहना है कि यदि सरकार की नीयत ठीक होती तो पहले गन्न मूल्य की घोषणा करती। उसके बाद चीनी मिलों को चलाए जाने की बात करती। आखिर सरकार बकाए गन्ना मूल्य पर मौन क्यों है? वहीं भाजपा नेता जितेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि बिना गन्ना मूल्य घोषणा के ही चीनी मिलों को चलाए जाने का निर्देश देना किसानों को छलने की तैयारी है। बसपा नेता राम प्रसाद जायसवाल का कहना है कि किसान हितैषी सरकार का दावा करने वाली सपा सरकार की पोल खुल चुकी है।