फाजिलनगर। व्यक्तित्व निर्माण में मूल्यों का बहुत महत्व है। मूल्यहीनता की स्थिति मनुष्य को पतन की ओर ले जाती है। भारतीय संस्कृति इसीलिए पूरी दुनिया में सर्वश्रेष्ठ है, क्योंकि हमारे समाज में मूल्यों की महत्ता सर्वाधिक है।
ये बातें एसवीएमपीजी कालेज फाजिलनगर में शुक्रवार को आयोजित दो दिवसीय अखिल भारतीय संस्कृत संगोष्ठी में मुख्य वक्ता डा. हरेराम त्रिपाठी ने कहीं। संस्कृत वांङ्मय में विहित मानव मूल्यों की परिकल्पना विषयक संगोष्ठी में डा. त्रिपाठी ने कहा कि मूल्यों की बदौलत ही मानव में सच्चाई, सहयोग, परोपकार, राष्ट्रभक्ति, दान, दया, समाजसेवा आदि की भावना विकसित होती है। विशिष्ट अतिथि और खगड़िया के जिला जज त्रिलोकीनाथ त्रिपाठी ने कहा कि मूल्य का तात्पर्य सत्य, सौंदर्य और देवत्व से है। अध्यक्षीय संबोधन में डा. माधोराज द्विवेदी ने कहा कि मूल्य आधारित सामाजिक जीवन में अस्पृश्यता के लिए कोई जगह नहीं होती। इस बुराई को समाप्त करके ही हम मानव मूल्यों की रक्षा कर सकते हैं। कार्यक्रम की शुरुआत कालेज के प्राचार्य डा. आेंकार नाथ मिश्र ने मां सरस्वती के चित्र पर पुष्पार्चन से किया। कालेज की छात्रा कुमारी कनक दूबे और शिखा ने स्वागत गीत गाया। संगोष्ठी के संयोजक डा. कृष्णचंद चौरसिया ने विषय परिवर्तन किया। इस दौरान विद्यालय के प्रबंधक शक्तिप्रकाश दीक्षित, डा. प्रणव चतुर्वेदी, डा. ममता त्रिपाठी, डा. ज्योत्स्ना पांडेय, डा. शमीम राइन समेत तमाम लोग मौजूद थे।