फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kushinagar News: खतरनाक श्रेणी में 5,593 गर्भवती महिलाएं, बीपी, एनीमिया और थायराइड बनी वजह

विज्ञापन
विज्ञापन
पडरौना। अप्रैल से अगस्त के बीच पंजीकृत कुल 49,128 गर्भवती महिलाओं में 5,593 हाई रिस्क प्रेग्नेंसी श्रेणी में चिह्नित की गई हैं। इसकी वजह बीपी, एनीमिया और थायराइड बताई जा रही है। प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा का खतरा बना रहता है। गर्भवती महिलाओं की जांच में खून की कमी (एनीमिया), हाई ब्लड प्रेशर और थायराइड के मामले ज्यादा पाए गए हैं। जिन्हें नियंत्रित करने के लिए ई-कवच एप और अस्पतालों के जरिए लगातार इलाज व दवाएं दिया जा रहा है। इस श्रेणी की गर्भवती महिलाओं को अस्पताल में पौष्टिक आहार व दवाओं के नियमित सेवन की सलाह दी जा रही है। ऐसी महिलाओं के सुरक्षित प्रसव और खतरे से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग ने तय मानक के अनुसार निगरानी बढ़ा दी है।
विज्ञापन

स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ के मुताबिक, हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के मामलों में वृद्धि की वजह बदलती जीवनशैली, तनाव, खानपान सहित अन्य दूसरे कारण हैं। यहां हर 50 गर्भवती महिलाओं में से पांच से छह हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की श्रेणी में शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के मामलों को कम करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। जिसमें प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान चलाया जा रहा है।
इसके तहत प्रत्येक माह की 1, 9, 16, 24 तारीख को गर्भवती महिलाओं की विशेषज्ञ चिकित्सक के जरिये गुणवत्तापूर्ण जांच, परामर्श एवं जोखिम की पहचान सुनिश्चित की जाती है। चिह्नित महिला की लाइन लिस्टिंग एवं व्यक्तिगत ट्रैकिंग की जाती है तथा सुरक्षित प्रसव और प्रसवोत्तर 45 दिन तक फॉलोअप का प्रावधान है। हाई रिस्क की श्रेणियों की पहचान गंभीर एनीमिया, थायरॉइड, बहुगर्भावस्था, किशोर गर्भावस्था आदि जोखिमों की समय से पहचान कर प्रबंधन किया जा रहा है। आशा कार्यकर्ताओं से नियमित फॉलोअप कराया जा रहा है। प्रत्येक चिह्नित को महिला को नजदीकी एफआरयू से जोड़ा जा रहा है ताकि जटिलता होने पर समय पर विशेषज्ञ उपचार एवं सुरक्षित प्रसव कराया जा सके। जांच, दवा, प्रसव, रक्त व परिवहन जैसी सेवाएं मुफ्त उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
विज्ञापन

0

हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के कारण
मेडिकल कॉलेज कुशीनगर की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. संगीता जायसवाल ने बताया कि प्रसूता का वजन 35 किलोग्राम से कम है तो वह हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की श्रेणी में है। एनीमिया,शुगर, ब्लड प्रेशर, थायराइड, अधिक उम्र में गर्भधारण,पिछली बार सिजेरियन आदि प्रमुख कारण हैं। इसके अलावा जंक फूड, शारीरिक गतिविधि न होना और मानसिक तनाव भी जोखिम को बढ़ाते हैं। प्रेग्नेंसी के दौरान पौष्टिक भोजन करना जच्चा-बच्चा दोनों के लिए बेहतर व फायदेमंद होता है।

0
लक्षण को नजरअंदाज न करें

हाई रिस्क प्रेग्नेंसी में लगातार सिरदर्द, धुंधला दिखना, पैरों और चेहरों पर सूजन, पेट में तेज दर्द,ब्लीडिंग,भ्रण का हलचल कम होना और ब्लड प्रेशर बढ़ना आदि के संकेत मिलते हैं। समय पर ध्यान न देने पर मां और बच्चा दोनों को खतरा हो सकता है।
0

हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की इलाज करने पहुंच रहे गर्भवती महिलाएं:-
मेडिकल कॉलेज कुशीनगर के एमसीएच विंग में ओपीडी के दौरान करीब 60 महिलाएं दोपहर तक पहुंचकर उपचार कर चुकी थीं। इनमें से 50 फीसदी यानी 30 महिलाएं गर्भवती रहीं। इन गर्भवती महिलाओं में से खून की कमी (एनीमिया) और हाई ब्लड प्रेशर की भी शामिल रहीं। हाई रिस्क प्रेग्नेंसी श्रेणी की गर्भवती महिला नीलम इलाज कराने के लिए पहुंची थीं। इनकी जांच के दौरान ब्लड प्रेशर 70/100 था। जरूरी दवाएं व सावधानी बरतने की महिला डॉक्टर ने सलाह दिया। वहीं हाई रिस्क श्रेणी की मोनिका इलाज के लिए आईं थी। इनकी जांच में रिपोर्ट आठ ग्राम खून का मिला। खानपान व दवाओं को समय से खाने के लिए सलाह दी गई।

0
जिले की हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की स्थिति
जिले में पांच महीने में नई गर्भवती महिलाओं की संख्या 49,128 हैं। इनमें 5593 महिलाएं हाई रिस्क श्रेणी में हैं। 1,936 हाई ब्लड प्रेशर, 1,756 गंभीर एनीमिया, 1,131 थायराइड, 249 सिफलिस, 233 कम उम्र में गर्भधारण, 203 अधिक उम्र में गर्भधारण, 91 शुगर, 25 टीबी के संभावित लक्षण, छह एकलेम्पसिया, तीन हेपेटाइटिस बी, एक एचआईवी पॉजिटिव के मामले शामिल हैं।

0
गर्भवती महिलाओं को बच्चे के मानसिक विकास और एनीमिया से बचने के लिए हरी पत्तेदार सब्जियां,दालें व ताजे फल आदि खाने चाहिए। इसके अलावा कैल्शियम और प्रोटीन युक्त जैसे दूध,पनीर,अंडा व फाइबर और पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए। विशेषज्ञ डाक्टर के बताए गए सलाह के मुताबिक दवाओं का नियमित सेवना करना चाहिए। कोई समस्या होने पर तत्काल डाक्टर से परामर्श लेना चाहिए। देर नहीं करनी चाहिए। -डॉ.अर्पिता सिंह, आहार विशेषज्ञ, मेडिकल कॉलेज कुशीनगर
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें