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Kushinagar News: 35 परिवारों को लालच देकर लोन दिलाया, 40 लाख लेकर दंपती फरार

Fri, 27 Dec 2024 12:12 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
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पडरौना/दुदही। माइक्रो फाइनेंस कंपनियों से कर्ज लेने के बाद वसूली करने वाले एजेंटों से दुदही क्षेत्र की महिलाएं परेशान हैं। विशुनपुरा थाना क्षेत्र के गौरी श्रीराम के बैदौली मुसहर टोली में 35 से अधिक मुसहर परिवार की महिलाओं को रुपयों का लालच देकर एक दंपती ने समूह का लोन ले लिया।
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एक-दो नहीं, कई माइक्रो फाइनेंस कंपनियों से 40 लाख रुपये अधिक रकम लेने के बाद से दंपती फरार हैं। ऐसे में एजेंट उन महिलाओं के घर वसूली करने पहुंच रहे हैं, जिनके नाम पर कर्ज लिया गया है। तीन माह पहले यह मामला पुलिस के पास पहुंचा था, लेकिन अब तक इस मामले में केस दर्ज नहीं किया गया है।
लिहाजा, अब स्थिति यह है कि वे महिलाएं बाइक की आवाज सुनकर ही गांव छोड़कर भागने लग रहीं हैं। पूरा का पूरा गांव महिलाओं से खाली हो जा रहा है। परिवार के पुरुष भी इधर-उधर भागने को मजबूर हैं। महिलाओं का दिन गन्ने के खेत में छुप-छुपकर गुजरा कर रही हैं तो उनकी रातों की नींद भी उड़ गई है। जिन मुसहर परिवार की महिलाओं को मूस से माउस तक ले जाने का प्रयास किया गया, वे भी इस कर्ज की दलदल में बुरी तरह से फंस चुकीं हैं।
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मामला दुदही क्षेत्रके गौरी श्रीराम गांव के बैदौली मुसहर टोले का है। यहां के निवासी अमीरुद्दीन अंसारी ने 35 मुसहर परिवारों की अनपढ़ महिलाओं को लालच का झांसा देकर उन्हें अपनी साजिश का शिकार बनाया है। गांव की ज्ञांति, बदमिया, विधांती, सुशीला, गायत्री, मंजू, मीना, निशा, संगीता सिलमी, बढ़िया, रंभा, मयंती, दुर्गावती, बसंती आदि 35 महिलाओं को दो-दो हजार रुपये की लालच देकर करीब 40 लाख से अधिक रुपये निकलवा लिए ।
किसी महिला से छह समूह तो किसी से चार या पांच समूह का कर्ज लिया गया है। रकम लेने के बाद अमीरुद्दीन अपने पूरे परिजनों के साथ घर पर ताला लगाकर फरार हो चुका है। लिहाजा, अब वसूली के लिए जब एजेंट गांव में पहुंच रहे हैं तो उनकी प्रताड़ना से आजिज होकर महिलाएं घर छोड़ खेतों में छिपने को मजबूर हो गईं हैं।
असली कागजात पर भी लोन नहीं : विभिन्न माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के एजेंटों की ओर से गांव-गांव में एक दंपती को लीडर बनाया जा रहा है और उसी लीडर के भरोसे कर्ज का वितरण किया जा रहा है। अगर कोई महिला सब कुछ सही कागजात लेकर जाए तो उसे कर्ज देना तक एजेंट उचित नहीं समझते।
वहीं, अगर लीडर दंपती की ओर से फर्जी कागजात तैयार कराकर दिया जाए तो एजेंट बिना कुछ जांचे-परखे लोन की रकम दे दे रहे हैं। यही नहीं, गांवों में समूह निकालने का एक अलग ही तरह की खेल चल रहा है। अधिकांश समूह के एजेंट लीडर दंपती को यह भी पढ़ा रहे हैं कि ज्यादा से ज्यादा अनपढ़ महिलाओं को समूह में शामिल करें।
उन्हें एक हजार से लेकर दो हजार रुपये देने का लालच दें और फिर अधिक रकम तक कर्ज निकाल कर 50-50 प्रतिशत यानि 50 प्रतिशत एजेंट व 50 प्रतिशत दंपती आपस में बांट लें। चर्चा यह भी है कि एजेंटों की ओर से कहा जा रहा है कि वसूली के लिए एक से दो वर्ष तक दबाव बनेगा और फिर वसूली बंद कर दी जएगी।ा
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