मनरेगा मद का 3,850 लाख रुपये बकाया, गांवों में विकास कार्य प्रभावित
900 मनरेगा कर्मचारियों को चार माह से नहीं मिला वेतन
मनरेगा मजूदरों को समय से नहीं मिल रही मजदूरी
पडरौना। जिले के सभी 14 ब्लॉकों में मनरेगा से विकास कार्य कराए जा रहे हैं। आठ महीने से सामग्री और मजदूरी का 3,850 लाख रुपये का भुगतान नहीं हुआ है। इससे व्यवसायी सामग्री देने से कतरा रहे हैं। लिहाजा गांवों का विकास भी प्रभावित हो रहा है।
मनरेगा के तहत 14 ब्लॉकों में पशु शेड, सड़क, नाले और तालाबों के सुंदरीकरण आदि का कार्य चल रहा है। वित्तीय वर्ष 2021-22 में मनरेगा मद से 14 ब्लॉकों में 3850.78 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। वर्ष 2022-23 में 351.4 लाख रुपये खर्च हुए हैं। बताया जा रहा है केंद्र सरकार की ओर मनरेगा मद में जिले में रकम नहीं भेजी जा रही है। इससे भुगतान का संकट खड़ा हो गया है। इतना ही नहीं, मनरेगा विभाग के 900 कर्मचारियों को वेतन भी नहीं मिल पा रहा है। एपीओ, रोजगार सेवक, तकनीकी सहायक आदि चार माह से वेतन के लिए तरस रहे हैं। इनका कहना है कि वेतन ही जीवन यापन का आधार है। यही समय से नहीं मिल रहा है। कर्ज लेकर काम चलाना पड़ता है। संवाद
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वर्ष 2022-23 ब्लॉक वार खर्च किए रुपये लाख में
ब्लॉक खर्च
दुुदही 5.58
फाजिलनगर 6.85
हाटा 19.74
कप्तानगंज 114.51
कसया 1.33
खड्डा 19.68
मोतीचक 14.61
नेबुआ नौंरगिया 36.7
पडरौना 34.24
रामकोला 15.61
सेवरही 37.9
सुकरौली 20.78
तमकुहीराज 20.72
विशुनपुरा 2.57
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वर्ष 2021-22 मनरेगा मद में खर्च किए गए रकम (लाख में)
ब्लॉक खर्च
दुुदही 91.26
फाजिलनगर 376.75
हाटा 283.47
कप्तानगंज 349.49
कसया 67.18
खड्डा 114.19
मोतीचक 320.33
नेबुआ नौंरगिया 319.7
पडरौना 322.06
रामकोला 312.97
सेवरही 324.07
सुकरौली 345.4
तमकुहीराज 401.05
विशुनपुरा 216.55
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सबसे अधिक तमकुहीराज ब्लॉक में हुआ खर्च
मनरेगा मद से जिले में सबसे अधिक खर्च तमकुहीराज ब्लॉक में किया गया है। इस ब्लॉक में अब मनरेगा से कार्य कराने में दिक्कत आ रही है। केंद्र सरकार की ओर से जिले में मनरेगा मद में रकम नहीं आने से सामग्री का भुगतान नहीं हो पा रहा है। अधिक बकाया होने से विक्रेता सामग्री देने से मना कर रहे हैं।
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एक से दो माह में हो भुगतान
उधार सामग्री देने वाले राजेश, मनोज, सुनील, अजय आदि ने कहा कि ग्राम पंचायत को सामग्री दिया गया है। आठ महीने से रकम नहीं मिलने से व्यवसाय प्रभावित होता है। ईंट भट्ठों के संचालकों का कहना है कि सरकार को समय से सामग्री का भुगतान कर देना चाहिए।
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केंद्र सरकार की योजना है कि गांव में ही मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराया जाए। कार्य करने के बाद भी समय से रकम नहीं मिल रहा है। इससे मजदूर बाहर कमाने चले जाते हैं।
राजेश गुप्ता, मनरेगा मजदूर
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छह महीने पहले 24 दिन काम किया था। भुगतान अब तक नहीं हो पाया है। शिकायत करने पर प्रधान व रोजगार सेवक ध्यान नहीं देते है।
राम अशीष गोंड, मनरेगा मजदूर
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कोरोना काल से घर पर रहकर मजदूरी कर जीवन-यापन कर रहा हूू। गांव में जब भी मनरेगा के तहत कार्य आता है तो सबसे पहले पहुंचता हूं। 20 दिन की मजदूरी दो माह से नहीं मिली है।
बीरू कुमार, मनरेगा मजदूर
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मजदूरों की मजदूरी समय से नहीं मिलती। जिले स्तर के अधिकारियों को समस्या का समाधान कर समय से भुगतान करा देना चाहिए।
सारधानंद, मनरेगा मजदूर
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कोट
केंद्र सरकार की ओर से मनरेगा मद में रकम नहीं आया है। जिले स्तर से कागजी कार्यवाही पूरी कर भेज दिया गया है। जल्द ही रकम आने पर भुगतान करा दिया जाएगा।
अनुज मलिक, सीडीओ